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April 27, 2026
अभिभावकों से मिलें, उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दें, अपने स्कूल का नाम रोशन करें शिक्षक- देवनानी
विधानसभा अध्यक्ष ने किया संस्था प्रधानों की संगोष्ठी को संबोधित
अजमेर शहर के 49 संस्था प्रधानों ने लिया संगोष्ठी में भाग
अजमेर, 27 अप्रेल। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि शिक्षक अपने क्षेत्र में अपने स्कूल के प्रतिनिधि बनकर काम करें। अभिभावकों से मिलें, नामांकन बढाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को 60 प्रतिशत से अधिक अंक लाने, ज्यादा गार्गी पुरस्कार जीतने के लिए प्रेरित करें।
विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय माध्यमिक शिक्षा द्वारा तोपदड़ा स्थित शिक्षा संकुल में आयोजित संस्थाप्रधान संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में अजमेर शहर के समस्त 49 संस्थाप्रधान उपस्थित रहे।
विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि विद्यालयों में नामांकन वृद्धि के लिए न्यूनतम 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया जाए तथा जहां संभावनाएं अधिक हैं वहां इसे डेढ़ गुना तक बढ़ाने का प्रयास किया जाए। अजमेर में नामांकन बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। उन्होंने बालिकाओं के नामांकन अनुपात को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा में बेटियों की भागीदारी बढ़ना सामाजिक प्रगति का संकेत है। उन्होंने कहा कि एसएमसी, एसडीएमसी, अभिभावकों, क्षेतर्् के प्रभावशाली व्यक्तियों तथा भामाशाहों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जितने विद्यार्थी 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर पाए हैं, अगले वर्ष उनकी संख्या कम से कम डेढ़ गुना होनी चाहिए। प्रत्येक विद्यालय अपनी रैंकिंग में सुधार लाए तथा अजमेर जिला राज्य स्तर पर शीर्ष पांच जिलों में स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित करे। उन्होंने कहा कि हमारे टॉपर्स की संख्या बढ़नी चाहिए, गार्गी पुरस्कारों में वृद्धि होनी चाहिए और विद्यालयों की शैक्षणिक पहचान मजबूत होनी चाहिए।
श्री देवनानी ने कहा कि प्राचार्य केवल प्रशासक नहीं बल्कि विद्यालय के संरक्षक होते हैं। उन्हें विद्यालय को अपने स्वयं के घर और विद्यार्थियों को अपने बच्चों के समान मानकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राचार्य नियमित रूप से विद्यालय का निरीक्षण करें, रिक्त पीरियड में स्वयं कक्षा में जाकर शिक्षण कार्य करें तथा विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करें। यदि कोई शिक्षक अवकाश पर हो तो शिक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए। सप्ताह में कम से कम एक दिन शिक्षकों के साथ बैठक कर उत्कृष्ट एवं कमजोर विद्यार्थियों के लिए अलग रणनीति बनाई जाए। लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राचार्य विद्यालय में 30 मिनट पूर्व तथा 30 मिनट बाद तक उपस्थित रहें। इससे अनुशासन, स्वच्छता, संसाधनों की निगरानी तथा समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बैठने की व्यवस्था, कक्षा कक्ष, ब्लैकबोर्ड, फर्नीचर, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का नियमित आकलन किया जाए।
उन्होंने बताया कि विद्यालयों में कक्षा कक्ष निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत कर निर्माण कार्य करवाए गए हैं। यदि कहीं कार्य में देरी हो रही है तो संस्थाप्रधान स्वयं जानकारी लेकर कार्य में गति सुनिश्चित करें। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में जर्जर विद्यालय भवनों के सुधार के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। जर्जर कक्षों में विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जाए तथा आवश्यक बजट के लिए समय पर पत्रचार किया जाए।
उन्होंने विद्यालय परिसर को स्वच्छ, हरित और आकर्षक बनाने को निर्देशित किया। झाड़ियों की छंटाई, साफ-सफाई, पानी निकासी, वृक्षारोपण तथा रखरखाव जैसे कार्य सामूहिक प्रयास से किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालय विकास के लिए क्षेतर्् के भामाशाहों की सूची तैयार की जाए तथा उनसे संपर्क स्थापित कर सहयोग प्राप्त किया जाए। एसडीएमसी की नियमित बैठकें आयोजित हों और विधायक कोष, डीएमएफटी तथा अन्य योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
संगोष्ठी से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय माध्यमिक शिक्षा अजमेर के कुर्कमुक्त हुए कक्ष का अवलोकन किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती दर्शना शर्मा ने उनका स्वागत करते हुए कक्ष को कुर्कमुक्त कराने के लिए शासन स्तर पर दिए गए निर्देशों के लिए आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा श्री अनिल शर्मा, श्री महावीर कुमार शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी श्री गोविंद नारायण शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती दर्शना शर्मा, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी श्री रामनिवास गालव, श्री दिनेश ओझा, श्री चन्द्रशेखर शर्मा सहित अन्य प्राचार्य एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
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