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April 8, 2026
जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राजस्थान से जुड़े दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। इसमें जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना और पचपदरा (बालोतरा) रिफाइनरी की लागत बढ़ाने को स्वीकृति दी गई है। इस फैसले को राज्य के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पीएम मोदी ने इसे जयपुर के लिए “बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड” बताते हुए कहा कि इससे शहर की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, ट्रैफिक जाम कम होंगे और लोगों की जीवनशैली आसान बनेगी।
जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना को वर्ष 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह 41 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रहलादपुरा (सीतापुरा) से टोडी मोड़ (हरमाड़ा) तक विकसित किया जाएगा, जिसमें कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना की कुल लागत 13,037.66 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसे राजस्थान मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा पूरा किया जाएगा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 भागीदारी होगी। यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख क्षेत्रों जैसे सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर को आपस में जोड़ेगा। एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनाए जाएंगे।
यह परियोजना मौजूदा फेज-1 से इंटरचेंज और फीडर सिस्टम के जरिए जुड़कर पूरे जयपुर शहर में एक इंटीग्रेटेड मेट्रो नेटवर्क तैयार करेगी। वर्तमान में जयपुर मेट्रो के पहले फेज में लगभग 60 हजार यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं, जो 11.64 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर और 11 स्टेशनों तक सीमित है। फेज-2 के शुरू होने के बाद यात्री संख्या में कई गुना बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और शहर में ट्रैफिक व प्रदूषण दोनों में कमी आएगी। साथ ही पर्यटन और शहरी गतिशीलता को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार की मंजूरी से पहले इस परियोजना की डीपीआर का विस्तृत आकलन पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड और इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप द्वारा किया गया था। अब मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही पचपदरा रिफाइनरी की परियोजना लागत बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है, जो राजस्थान के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह रिफाइनरी मारवाड़ क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, इन दोनों परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से राजस्थान में शहरी विकास, औद्योगिक विस्तार और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुलने जा रहा है।
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