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April 8, 2026
अजमेर के राम नगर में सड़क किनारे ठेला लगाकर 5- 10 रुपए में कपड़े प्रेस करने वाले जितेंद्र बाड़ोलिया को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भेजा 598 करोड़ 50 लाख 37 हज़ार 726 रुपए का डिमांड नोटिस,
कुछ साल पहले खोया था पैन कार्ड और आधार कार्ड, पाली के रहने वाले शत्रुघ्न ने उसी का दुरुपयोग कर सूरत में मनन एंटरप्राइजेज कंपनी खोलकर किया फ्रॉड
अजमेर के गंज थाना अंतर्गत राम नगर में सड़क किनारे दिन भर खड़े रहकर पेंट और शर्ट प्रेस करके दिन भर में पांच सात सौ रुपए कमाने वाले जितेंद्र बाड़ोलिया इनकम टैक्स के रिकॉर्ड में 598 करोड़ 50 लाख 37 हज़ार 726 रुपए के लेन-देन से जुड़े “कारोबारी” निकले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से इतनी भारी भरकम रकम का डिमांड नोटिस मिलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
घबराए हुए जितेंद्र सीधे वकील बाबू के पास पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी उनसे साझा कर सहायता की विनती की।
वकील बाबू द्वारा पता करने पर सामने आया कि इनकम टैक्स विभाग ने उनसे नोटिस में हीरे-जवाहरात के कारोबार से जुड़े ट्रांजेक्शन का जिक्र है, जबकि जितेंद्र का कहना है कि उनका इस तरह के किसी भी कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। वह रोजाना मेहनत कर कपड़ों पर प्रेस कर अपना ओर परिवार का गुजारा करते हैं।
जितेंद्र के वकील राकेश ठाडा के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि उनके पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है। जितेंद्र ने बताया कि करीब दो साल पहले उनका पैन ओर आधार कार्ड खो गया था, जिसके बाद संभवतः किसी ने उसके आधार पर बैंक खाता खुलवाया और बड़े स्तर पर लेन-देन किया। यही नहीं, उसी पहचान के आधार पर जीएसटी नंबर जारी करवाकर फर्म भी संचालित की गई।
आशंका जताई जा रही है कि पाली निवासी एक डायमंड कारोबारी ने इस पहचान का दुरुपयोग करते हुए सूरत (गुजरात) में ‘मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्म खोली और करोड़ों का कारोबार किया। बताया जा रहा है कि इसी फर्म के जरिए करीब 3 महीने में 600 करोड़ रुपए के आसपास का ट्रांजेक्शन किया गया।
मामले को लेकर गंज थाना पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। वहीं इनकम टैक्स विभाग ने संबंधित बैंक मैनेजर को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि इतने बड़े ट्रांजेक्शन के बावजूद नियमानुसार सूचना क्यों नहीं दी गई।
यह मामला सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम और पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक साधारण मजदूर के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करोड़ों का लेन-देन होना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह बताता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी चूक हुई है, जिसकी जांच अब एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
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