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April 7, 2026
बकरी पालन (गिफ्ट ए गोट कार्यक्रम) से बदलेगी विमुक्त परिवारों की आजीविका
50 परिवारो को दी गई उन्नत नस्ल की बकरी, 300 परिवार आगे के लिए चिन्हित
राजस्थान महिला कल्याण मंडल के द्वारा विमुक्त एवं वंचित समुदाय के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए संचालित रक्षा परियोजना के अन्तर्गत 50 लाभान्वित परिवारों को उन्नत नस्ल की बकरी देकर आजीविका संवर्धन के लिए सहयोग किया गया। संस्था निदेशक राकेश कुमार कौशिक ने बताया कि विषेश सप्ताह के दौरान क्षैत्र के 50 घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु समुदाय एवं अतिगरीब परिवारों को स्थायी एवं बहुआयामी आजीविका विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से गिफ्ट ए गोट कार्यक्रम के माध्यम से उन्नत नस्ल की बकरी दी गई है। परिवारों के द्वारा बकरी के मेमने, खाद, दूध आदि से अपनी आय बढ़ाने के साथ साथ, पौषण तथा सामाजिक जीवन स्तर में भी सुधार की संभावनाएं बढेगी।
निदेशक श्री कौशिक ने बताया कि विमुक्त समुदाय के लोग अपनी आजीविका के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते रहते हैं, जिसके कारण उनका स्थायित्व नहीं बन पाता। इस अस्थिर जीवनशैली के चलते बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता और वे अपने अधिकारों से भी वंचित रह जाते हैं। इन सब चुनौतियों को समाप्त करने के लिए रक्षा परियोजना के माध्यम से सकारात्मक पहन करते हुए इन परिवारों के साथ बकरी पालन, किचन गार्डन, मुर्गी पालन आदि गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है साथ ही पात्रता के आधार पर केन्द्र एवं राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है।
संस्था के द्वारा 300 परिवारों को चिन्हित किया गया है जिनके साथ नियमित गतिविधियॉ करने से परिवारों का पलायन रूका है, बच्चों को शिक्षा से नियमित किया गया है तथा स्वास्थ्य से जुड़ी आदतों में सुधार हुआ है। बकरी पालन रोजगार के विकल्प के रूप में इन परिवारों के लिए बहुत अधिक प्रभावी हो रहा है क्यौंकि इन सभी के लिए ये परम्परागत कार्य रहा है। संस्था के द्वारा नियुक्त पशु सखी के माध्यम से उन्नत तरीकों एवं बेहतर प्रबंधन के लिए प्रषिक्षण देकर जोखिम को कम करके लाभ को बढ़ाया जा रहा है। नियमित टीकाकरण, डीवर्मिंग एवं चारा, दाना, पानी तथा आवास का उचित प्रबंधन करके बकरी के स्वास्थ में सुधार से मृत्यु दर में कमी होने से बकरी पालन को स्थाई एवं मुख्य आजीविका विकल्प के रूप में विकसित करने में रूझान बढ़ा है। लाभार्थी समुदाय के गॉव स्तर पर बकरी पालक समूह बनाए गए है जिनको उन्नत एवं बेहतर बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण दिया जाकर जागरूक किया जा रहा है एवं समय-समय पर पशु स्वास्थ्य जांच, डीवर्मिंग एवं टीकाककरण आदि केम्प भी लगाए जा रहें है। आगामी 2 वर्षों 300 परिवारों को बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं किचन गार्डन के साथ अन्य सभी गतिविधियों से नियमित लाभान्वित किया जाएगा।
श्री कौशिक ने कहा कि रक्षा परियोजना की यह पहल केवल बकरी वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन परिवर्तन का मिशन है जो वंचित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें एक नई दिशा दे रहा है। आने वाले समय में यह प्रयास न केवल आर्थिक बदलाव लाएगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सशक्तिकरण का भी मजबूत आधार बनेगा।
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