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March 21, 2026
एक माह तक रमजान माह में इबादत करने के बाद ईद के मौके पर मुस्लिम समाज में खुशी का माहौल, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की दरगाह सहित ईदगाह में नमाजियों ने अदा की ईद की नमाज, गले मिल कर दी मुबारकबाद, सियासतदानों ने भी दी मुबारकबाद
अजमेर में शनिवार को मुस्लिम समुदाय ने ईद की नमाज अदा की। अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की दरगाह में सुबह करीब 8 बजे नमाज हुई, जहां बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। वहीं, शहर की मुख्य नमाज कैसरगंज स्थित ईदगाह में अदा की गई। नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने देश में अमन, चैन, शांति और भाईचारा कायम रहने की दुआ मांगी।
इस अवसर पर दरगाह शरीफ में सुबह 4:30 बजे जन्नती दरवाजा खोला गया। जन्नती दरवाजा खुलते ही देशभर से आए जायरीनों की भीड़ उमड़ पड़ी। जायरीन जन्नती दरवाजे से होकर जियारत करते नजर आए। यह दरवाजा आधे दिन के लिए खोला गया, जिसके चलते दरगाह परिसर में सुबह से ही खासा उत्साह और रौनक देखने को मिली।
अजमेर शरीफ की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (ख्वाजा गरीब नवाज) की दरगाह परिसर में स्थित जन्नती दरवाजा साल में मात्र चार बार ही खुलता है। इस पवित्र द्वार को पार करने की मान्यता है कि इससे जायरीन को जन्नत (स्वर्ग) नसीब होती है। जायरीन इस अवसर पर यहां उमड़ते हैं और सात बार चक्कर लगाकर दुआ करते हैं यह दरवाजा दरगाह का ऐतिहासिक द्वार है, जो आम दिनों में बंद रहता है। केवल खास मौकों पर ही इसे खोला जाता है, जिससे जायरीनों में उत्साह और आस्था की लहर दौड़ जाती है।धार्मिक परंपरा के अनुसार, जन्नती दरवाजा निम्नलिखित चार अवसरों पर खुलता है:ख्वाजा साहब के वार्षिक उर्स के दौरान — इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने में 1 से 6 रजब तक (करीब 6 दिन)। उर्स के दौरान यह सबसे लंबे समय तक खुला रहता है। उर्स की शुरुआत झंडा फहराने (बुलंद दरवाजा पर) के साथ होती है और जन्नती दरवाजा खुलने के साथ जायरीनों की भीड़ बढ़ जाती है।
ईद-उल-फित्र (रमजान के बाद) के दिन — सुबह से दोपहर 2:30 बजे तक।ईद-उल-फित्र के छठे दिन — हजरत ख्वाजा उस्मान-ए-हरूनी (ख्वाजा गरीब नवाज के पीर-ओ-मुर्शिद) के उर्स के मौके पर। इस दिन भी सुबह से दोपहर 2:30 बजे तक द्वार खुला रहता है।10 (ईद-उल-अजहा या बकरीद) के दिन — जुहर की नमाज के बाद सुबह से दोपहर 2:30 बजे तक।
इन मौकों पर खादिम परिवार के सदस्यों की देखरेख में विशेष इंतजाम किए जाते हैं। जायरीन सुबह से ही लंबी कतारों में लग जाते हैं।प्रत्येक बार जन्नती दरवाजा खुलने पर दरगाह परिसर में भक्ति का माहौल छा जाता है। जायरीन दूर-दूर से आते हैं — कुछ स्वास्थ्य लाभ, संतान सुख, नौकरी या शादी के लिए।“यह द्वार पार करना जैसे जिंदगी का सबसे पवित्र पल हो। सात चक्कर लगाते समय मन शांत हो जाता है और विश्वास होता है कि ख्वाजा साहब सुन रहे हैं।”खादिम सैय्यद मकसूद हसन खुशहाली व सैयद जहूर बाबा चिश्त कहते हैं कि यह द्वार सिर्फ चार बार खुलने से इसकी पवित्रता बनी रहती है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन विशेष इंतजाम करते हैं। अजमेर शरीफ की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। यहां सभी धर्म के लोग आते हैं। जन्नती दरवाजा इस समानता को और मजबूत करता है, क्योंकि इसका आशीर्वाद सभी के लिए है। सूफी परंपरा में ऐसे पवित्र स्थल भक्ति, प्रेम और शांति का संदेश देते हैं।
ख्वाजा साहब की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं — “सबको प्यार करो, किसी से नफरत मत करो।” जन्नती दरवाजा इसी संदेश का जीवंत प्रतीक है।
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