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March 13, 2026
पुष्कर में 93 लाख का बकाया: 68 सार्वजनिक पानी कनेक्शन कटे, गर्मियों में जल संकट की आशंका
तीर्थ नगरी पुष्कर में गर्मियों के बीच पानी को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है। राजस्थान सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने नगर परिषद पुष्कर पर करीब 93 लाख रुपये के बकाया बिल को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए शहर के करीब 68 सार्वजनिक पानी कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले हजारों पर्यटकों को भी आने वाले दिनों में पानी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार ये कनेक्शन नगर परिषद द्वारा विभिन्न वार्डों में लगाए गए सार्वजनिक नलों, परिषद की पेयजल आपूर्ति और सार्वजनिक शौचालयों से जुड़े हुए हैं। विभाग का कहना है कि यह बकाया राशि पिछले लगभग 10 वर्षों से जमा नहीं कराई गई है। कई बार पत्राचार और आग्रह करने के बावजूद भुगतान नहीं होने के कारण अब विभाग को कनेक्शन काटने की कार्रवाई करनी पड़ रही है।पीएचईडी पुष्कर के अभियंता भोला सिंह रावत ने बताया कि नगर परिषद को कई बार बकाया राशि जमा कराने के लिए कहा गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसे में उच्च अधिकारियों के निर्देश पर सार्वजनिक नलों के कनेक्शन बंद किए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है। इधर इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। पुष्कर निवासी आलोक भारद्वाज का कहना है कि वराह घाट चौक पर लगा सार्वजनिक नल करीब पचास वर्षों से लोगों की प्यास बुझा रहा था। यात्रियों के साथ-साथ आसपास के लोग और यहां तक कि जानवर भी इसी नल से पानी पीते थे। अचानक कनेक्शन काट देने से लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा ने बताया कि मामला करीब दस वर्षों के बकाया बिल से जुड़ा है। परिषद इस पूरे मामले में पुराने दस्तावेजों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि रोड कटिंग और अन्य मदों में जमा कराए गए पैसों के समायोजन की प्रक्रिया भी देखी जा रही है और जल्द ही विभाग से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। गर्मियों के बढ़ते तापमान और पुष्कर में लगातार बढ़ रहे पर्यटकों की संख्या को देखते हुए सार्वजनिक नलों के बंद होने से जल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों विभाग आपसी समन्वय से जल्द समाधान निकालें ताकि तीर्थ नगरी में पानी को लेकर कोई बड़ी समस्या खड़ी न हो।
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