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March 2, 2026
उदयपुर में इस बार होली के रंगों के साथ ठहाकों की गूंज भी सुनाई दी। भारतीय लोक कला मंडल में आयोजित भव्य हास्य कवि सम्मेलन ने कल रात शहर को हंसी के रंग में डुबो दिया। कार्यक्रम देर रात तक चला और श्रोता ठहाकों से गूंजते रहे। यह आयोजन उदयपुर होलसेल गोल्ड ज्वेलर्स एसोसिएशन और परमार्थ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत नैनीताल की कवयित्री गौरी मिश्रा ने सरस्वती वंदना से की। ग्वालियर के व्यंगकार तेजनारायण शर्मा ‘बैचेन’ ने अपने तीखे एक-लाइनर और चुटीले व्यंग्यों से माहौल को ठहाकों से सराबोर कर दिया। बारां से आए सुरेन्द्र यादवेन्द्र ने “चलो इंटरनेट का कोर्स ही हो गया...” जैसी रचनाओं से खूब हंसाया, तो भीलवाड़ा के दीपक पारीक ने “हरदम ग़म ग़म क्यों करता है...” सुनाकर तालियां बटोरीं।
इंदौर के वीर रस कवि मुकेश मोलवा ने ओजपूर्ण कविता से श्रोताओं में जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति पर देशभक्ति के नारे भी गूंजे। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे लाफ्टर प्रताप फौजदार। देश-विदेश के किस्सों और चुटीली शैली से उन्होंने दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। समापन तक उन्होंने मंच पर ऊर्जा बनाए रखी और जमकर तालियां बटोरीं। कवि सम्मेलन का संचालन राव अजातशत्रु उदयपुर ने किया। उनकी रचना “कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल...” को भी खूब सराहा गया। एसोसिएशन के संरक्षक यशवंत आंचलिया ने बताया कि दोपहर में फील्ड क्लब में आयोजित रक्तदान शिविर में 102 यूनिट रक्त एकत्र हुआ। समारोह में शहर विधायक ताराचंद जैन, कांग्रेस प्रदेश महासचिव लालसिंह झाला, डीएसपी जितेन्द्र आंचलिया समेत कई गणमान्य मौजूद रहे। राइजिंग स्टार के रूप में कई युवाओं का पगड़ी और उपरना पहनाकर सम्मान भी किया गया। होली के इस रंगारंग आयोजन ने साबित कर दिया कि उदयपुर में त्योहार सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि हंसी, कविता और सामाजिक सरोकारों से भी मनाया जाता है।
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