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February 17, 2026
जेएलएन अस्पताल में लीवर ट्यूमर का लेप्रोस्कोपिक से सफल ऑपरेशन
अजमेर। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय (जेएलएन अस्पताल) में सर्जरी विभाग की टीम ने 43 वर्षीय महिला मरीज राधा देवी(परिवर्तित नाम)के लीवर में पाए गए ट्यूमर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक द्वारा सफल ऑपरेशन कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
मरीज पिछले दो से तीन महीनों से लगातार पेट दर्द से परेशान थी तथा पेट में गांठ महसूस हो रही थी। परिजनों के अनुसार उन्होंने पहले कई अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन दर्द में कोई विशेष राहत नहीं मिली। इसके बाद मरीज ने जेएलएन अस्पताल में सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शिवकुमार बुनकर से परामर्श लिया।
डॉ. बुनकर द्वारा कराए गए सीटी स्कैन में पाया गया कि लीवर में लगभग 10×10×8 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ है, जो लीवर के काफी हिस्से को भी प्रभावित कर चुकी थी। मरीज की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रभाव से ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
चिकित्सकों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो दुष्परिणाम हो सकते थे व मरीज की जान को खतरा भी हो सकता था।
डॉ. बुनकर एवं उनकी टीम ने डॉ. श्याम भूतड़ा के मार्गदर्शन पश्चात सटीक योजना बनाकर दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) द्वारा ऑपरेशन किया । ऑपरेशन के दौरान गांठ के साथ लीवर का प्रभावित हिस्सा भी सुरक्षित रूप से निकाला गया (लीवर रिसेक्शन)। लीवर रिसेक्शन अत्यंत जटिल सर्जरी मानी जाती है, क्योंकि इसमें अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है तथा तकनीकी चुनौतियां अधिक होती हैं। साथ ही ऑपरेशन के दौरान पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) का भी सफलतापूर्वक 3 घंटे में ऑपरेशन किया गया।
विशेष उल्लेखनीय है कि जेएलएन अस्पताल में इस प्रकार का लीवर रिसेक्शन पहली बार दूरबीन द्वारा सफलतापूर्वक किया गया है। सामान्यतः इस प्रकार की जटिल सर्जरी बड़े शहरों या मेट्रो सिटी के उच्च स्तरीय अस्पतालों में ही की जाती है, लेकिन अब जेएलएन अस्पताल के सर्जरी विभाग में भी ऐसी उन्नत सर्जरी संभव हो रही है। इससे क्षेत्र के मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।
ऑपरेशन से पूर्व एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. अरविंद खरे ने मरीज की संपूर्ण जांच कर उसे सर्जरी एवं एनेस्थीसिया के लिए फिट घोषित किया। ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम द्वारा सभी जीवन रक्षक मानकों की सतत निगरानी रखी गई।
सर्जरी के पश्चात मेडिकल टीम के हेड डॉ. अनिल सामरिया के नेतृत्व में मरीज की गहन देखभाल की गई। बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन के चलते मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज पूर्णतः स्वस्थ है और आज उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है।
यह जटिल ऑपरेशन मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य( मा )योजना के तहत पूर्णतः निःशुल्क किया गया जबकि समान ऑपरेशन का मेट्रो सीटी के निजी अस्पताल में 4 से 5 लाख रुपए का खर्चा आता है।
ऑपरेशन टीम में डॉ. शिवकुमार बुनकर , डॉ.नरेश ,डॉ. हितेश शर्मा एवं डॉ. कौशल ,एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अरविन्द खरे, डॉ पूजा माथुर, डॉ कुलदीप , डॉ दीपिका ,ओटी स्टाफ गीता सिस्टर संजू सिस्टर एवं प्रतिभा सिस्टर व अन्य सहयोगी सदस्य शामिल रहे। सभी के समन्वित प्रयास से यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी।
▪️ एक्सपर्ट ओपिनियन
विभागाध्यक्ष एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शिवकुमार बुनकर ने बताया कि यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल प्रकृति का था। दूरबीन (लैप्रोस्कोपी) द्वारा सर्जरी की गई, जिसमें विशेष दक्षता और सावधानी की आवश्यकता होती है। इस तकनीक में बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिसे मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया भी कहते हैं इसमें मरीज के शरीर पर बड़े चीरे का निशान नहीं रहता। समय रहते ऑपरेशन कर देने से मरीज की जान को बड़ा खतरा टल गया। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट रही है।
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