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December 27, 2022
अजमेर पुलिस ने मोबाइल चोर गैंग का किया खुलासा ,पुलिस ने गैंग के मास्टर माइंड सहित 5 युवकों को गिरफ्तार कर करीब 20 लाख रुपए कीमत के 69 मोबाइल फोन किए बरामद,डिप्टी मेयर का मोबाइल चुराने वाले नाबालिग को भी डिटेन कर मोबाइल किया बरामद
अजमेर पुलिस ने एक ऐसे मोबाइल चोर गैंग का खुलासा किया है, जो वारदात करने के लिए खासतौर से झारखंड से यहां पहुंचा है। ये लोग भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देते। चोरी के मोबाइल फोन बांग्लादेश में बेचे जाते, ताकि पुलिस ट्रैक नहीं कर सके। पुलिस ने गैंग के मास्टर माइंड सहित 5 युवकों को गिरफ्तार कर करीब 20 लाख रुपए कीमत के 69 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें 1-1 लाख रुपए कीमत के 9 आईफोन भी शामिल हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। एसपी चूनाराम जाट के निर्देश पर पुलिस टीम ने डिप्टी मेयर का मोबाइल चुराने वाले नाबालिग को भी डिटेन कर मोबाइल बरामद कर लिया।
सिविल लाइन थाना प्रभारी दलबीर सिंह ने बताया कि 16 दिसंबर को डिप्टी मेयर नीरज जैन का आईफोन भी चोरी हुआ था। इसके बाद इसका वीडियो भी वायरल हुआ और पुलिस ने इसे चैलेंज के रूप लिया। जिला पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने इसके लिए साइबर सेल, सिविल लाइन थाना पुलिस, डीएसटी को निर्देशित किया और झारखंड धनबाद स्थित शिजवा जुक्ता निवासी संजय कुमार नौनिया पुत्र सुखदेन कुर्मी, नया टोला निवासी रामदर्शन कुर्मी पुत्र जंगली महतो, साहेबगंज महाराजपुर निवासी गोपाल कुमार मेहतो पुत्र राजकुमार, जगदीश मेहतो पुत्र रामप्रसाद और मीना बाजार महाराजपुर निवासी पवन कुमार यादव पुत्र शिव कुमार को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी बस स्टैंड के पीछे डीआरएम ऑफिस के पास से पकड़े गए हैं। जिला पुलिस की डीएसटी और साइबर सैल की मदद से आरोपियों की धरपकड़ की गई है। गिरफ्तार शातिरों से प्रारंभिक पूछताछ में ये पता चला है कि बांग्लादेश बॉर्डर के निकट ऐसे कई एजेंट सक्रिय हैं, जो बल्क में चोरी के मोबाइल की खरीद फरोख्त करते हैं। जब तक दूसरे देश की सरकार अनुमति नहीं दे देती, आईएमईआई से वहां मोबाइल ट्रैक नहीं कर सकते। इस तकनीकी खामी का फायदा उठाकर चोरी के मोबाइल बांग्लादेश में बेचे जाते हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि सिर्फ यही गैंग नहीं बल्कि मोबाइल चोरों की दूसरी गैंग भी चोरी की मोबाइल बांग्लादेश में बेचती हैं। बांग्लादेश में मोबाइल ट्रैक करने के लिए इंटरपोल की मदद लेनी होती है। मोबाइल चोरी के छोटे मामलों में यह संभव नहीं है।
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