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November 21, 2022
देश की नामी आयुर्वेद कंपनियों को निर्यात होने वाला पुष्कर का आंवला आया बीमारी की गिरफ्त में
पुष्कर और आसपास के लगभग 200 हेक्टेयर इलाके में आंवले की पैदावार पर अनजान कीट का प्रहार, पेड़ों को हो रहा है नुकसान
विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी पुष्कर अपने धार्मिक महत्व के साथ साथ बेहतरीन आंवलों की पैदावार के लिए भी देश दुनिया में जाना जाता है। पुष्कर के आंवले पतंजलि, डाबर, सहित देशभर की नामचीन आयुर्वेद कंपनियों को निर्यात किए जाते हैं लेकिन इस बार आंवले की फसल पर किसी अनजान कीट का प्रहार इस कदर हुआ कि पेड़ों के साथ-साथ लगने वाले आंवले भी खराब होने लगे हैं। आंवले की पैदावार करने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं ।
किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए कृषि विभाग और उद्यान विभाग से कृषकों की सहायता की अपील की है। उद्यान विभाग के विष्णु चंद ने जब कीट लगे आंवले के पेड़ों का निरीक्षण किया तो पाया कि पेड़ों की छाल उतरने लगी है, छाल के अंदर जाला नुमा कीड़ा लगा हुआ है। जिसकी वजह से आंवले के पेड़ों के पत्ते पीले होते जा रहे हैं तो वही फल भी खराब हो रहा है। ऐसे में उन्होंने बताया कि प्रोफेनोफॉस 50% ईसी और कुनालफोस 25 % ईसी का स्प्रे पेड़ों पर किया जाए , साथ ही पेड़ों की तने के नीचे जड़ों के आसपास एक मिट्टी का घेरा बनाकर उसमें मिथाईल पयोफेनेट 2% को 10 लीटर पानी में घोल तैयार कर जड़ों में डालें।
गौरतलब है कि पुष्कर सहित गनाहेड़ा, बांसेली, कोठी, चावंडिया, देवनगर के लगभग 200 हेक्टेयर इलाके में आंवले की पैदावार होती है। पुष्कर में पैदा हुआ आंवला देश की नामचीन आयुर्वेद कंपनियों को टनों की मात्रा में निर्यात किया जाता है। जिससे आयुर्वेद दवाओं का निर्माण होता है। आंवले का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ चवनप्राश बनाने में भी होता है जिसके चलते इसकी मांग बहुत ज्यादा होती है लेकिन इस बार इस अनजान बीमारी की वजह से जहां पैदावार की कमी हुई तो वही किसानों को पेड़ खराब होने की चिंता भी सताने लगी है। ऐसे में उन्होंने सरकार से किसानों की इस समस्या का समाधान करने के लिए कृषि विभाग उद्यान विभाग को निर्देशित करने की भी मांग की है।
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