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August 28, 2022
नसीराबाद रोड 7 पीपली बालाजी के प्राचीन मंदिर पर कथित मंदिर कमेटी के सदस्यों द्वारा किए गए कब्जे के विरुद्ध और कमेटी द्वारा की जा रही हठधर्मिता के खिलाफ क्षेत्रवासियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा था। रविवार को सभी क्षेत्रवासी लामबंद हो गए और उन्होंने मंदिर कमेटी के खिलाफ विरोध प्रकट करते हुए तत्काल कमेटी को भंग कर दिया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि मंदिर सार्वजनिक है किसी की बपौती नहीं है ना ही किसी ट्रस्ट का मंदिर है। ऐसे में कथित मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाना अन्य जाति धर्म के लोगों को मंदिर में प्रवेश करने से रोकना, चढ़ावा चढ़ाने से रोकना, पुजारी को बेदखल करना जैसे कृत्य किए जा रहे थे। जिससे धर्मावलंबियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। कई बार समझाने के बावजूद भी जब मंदिर कमेटी के पदाधिकारी नहीं समझे तो उनके खिलाफ सभी ने प्रस्ताव पारित करते हुए तत्काल कमेटी को भंग कर दिया गया है। जल्द ही नए चुनाव कराए जाएंगे और उसमें सभी बालाजी भक्तों को जिनमें महिलाएं भी शामिल होंगी को शामिल किया जाएगा। लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर कमेटी के पदाधिकारी ओम प्रकाश शर्मा, रूप किशोर सहित 2- 3 अन्य पदाधिकारी है जो मंदिर पर कब्जा जमाने की नियत से लोगों को मंदिर में आने से रोकते हैं, मंदिर के बाहर बैठने वाले भक्तों को भी वहां से खदेड़ दिया जाता है। जबकि मंदिर सार्वजनिक है जिसका भामाशाहों द्वारा कई बार जीर्णोद्धार कराया गया है। वही पुजारी पंडित हंसराज वैष्णव जो कि मंदिर पिछले 4 साल से सेवा पूजा कर रहे हैं उनका आरोप है कि उन्हें 3000 रुपये वेतन दिया जाता है जिसमें वह अपने परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पाते। ऐसे में मंदिर कमेटी के पदाधिकारी उन्हें यजमानों द्वारा दी जा रही दक्षिणा लेने से भी रोकते हैं वह कहते हैं कि यह मंदिर का पैसा है मंदिर में जमा कराओ जबकि यजमान उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा देकर जाते हैं और मंदिर के दानपात्र में अलग से भेंट डालते हैं। उन्होंने कहा कि अभी दो-तीन दिन पहले मंदिर कमेटी के तीन चार पदाधिकारियों ने उन्हें जबरन कमरे में बंद कर उनसे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए और उन्हें जबरन यहां से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि वे मंदिर में निस्वार्थ सेवा करते हैं और अपने परिवार के साथ रहते हैं। वही ब्राह्मण महासभा के पंडित सुदामा शर्मा ने बताया कि विप्र समाज के साथ हठधर्मिता और अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंदिर सभी समाज के लोगों का है और सार्वजनिक है। यहां पर किसी का दबाव सहन नहीं किया जाएगा। यदि मंदिर के पुजारी को बेदखल किया गया तो विप्र समाज आंदोलन पर उतारू हो जाएगा।
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