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July 30, 2022
समता भवन में शुक्रवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। साधु मार्गी जैन संघ के शासन दीपक विनय मुनि ने प्रवचन देते हुए कहा कि कभी सुख कभी दुख कभी धूप कभी छांव, कभी लाभ कभी हानि, कभी प्रशंसा कभी आलोचना, कभी आरोप कभी प्रत्यारोप होते हैं, इन सभी पर खरा उतरें। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के धागे को थामे रहें। मुनि ने कहा कि आजकल हमारा मन असंतुलित होता जा रहा है जबकि चरित्र आत्माओं व ऋषि मुनियों का सानिध्य मिलता रहा है। यह सब शूद्र दृष्टि के कारण हो रहा है। सबसे पहले शूद्र द्दष्टि को दिमाग से निकालना होगा। हमारा शरीर अच्छे और बुरे पदार्थों को समान स्थान देता है। इसी प्रकार शुद्ध व्यक्ति सभी के शत्रु और मित्र के प्रति एक जैसा व्यवहार रखता है। उन्होंने कहा कि भगवान के सिद्धांतों पर चलने से नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं। सम्यक द्दष्टि भाव जागरण करें। संकीर्ण विचारों से बाहर निकलें। मधुर मुनि ने कहा कि तीर्थंकर के शासन में साधु के बजाय साध्वियों की संख्या ज्यादा थी। तीर्थंकर भगवान के हाथों कभी भी शस्त्र नहीं रहा। धर्मसभा का संचालन अंकुश बोहरा ने किया। संघ सदस्य नोरतमल बाबेल ने बताया कि अभिषेक बांठिया ने 8 और यशु बांठिया ने 5 तपस्या की। मोनिका ओस्तवाल ने प्रत्याखान किए।
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