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#मधुकर कहिन: सारा दोष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य सरकार को देना गलत है 

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May 8, 2022

एक माह पहले से ही धार्मिक चिन्हों वाले झंडे न लगाने की हिदायत दे रही थी सरकार  घटना की आड़ में भाजपा से ज्यादा गहलोत को निपटाना चाहते हैं उनके कांग्रेसी मित्र 

 नरेश राघानी✒️ 

 अप्रैल माह की शुरुआत में ही सरकार ने अखबारों में घोषणा कर जब यह साफ-साफ निर्देशित किया था कि, कहीं भी धार्मिक चिन्हों वाले झंडे सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लगाए जाएंगे। तब कुछ लोगों ने इसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नादिरशाही करार दिया था । एक केंद्रीय मंत्री ने तो यह तक कहा था कि– रामनवमी पर डीजे यहाँ नहीं तो क्या पाकिस्तान में बजेगा ? उन्हीं दिनों मेरे एक पत्रकार मित्र ने मुझसे कहा कि – क्या सरकार पागल हो गई है ? यह हमारे त्योहारों पर ही क्यों होता है ? सुनकर उस समय मुझे भी पल भर के लिए लगा कि यह कुछ ज्यादा हो रहा है । लेकिन कल जो दुखद घटना जोधपुर में हुई और विवाद धार्मिक झंडे लगाने की बात पर ही शुरू हुआ तो मुझे अहसास हुआ वाकई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दूरदर्शिता और सही निर्णय लेने के लिए बदनाम होने की क्षमता का कोई जवाब नहीं है। अंतर्मन से गहलोत के लिए मन में आदर का भाव उत्पन्न हुआ।

 कल गहलोत का जन्मदिन था

 ऐसे वक्त ही यह घटना गहलोत के गृह जिले जोधपुर में गठित होना थोड़ा फिल्मी और अजीब नहीं लगता ?? क्या ये एक गांधीवादी नेता को जन्मदिन का तोहफा था ?? 

खैर !!! शाम को जब ऑनलाइन इस दुखद घटना का वीडियो किसी ने डाला तो मैं मेरे मित्र के यहाँ खाना खा रहा था। उसके 10 साल के बेटे ने यह वीडियो देखा तो बड़ी मासूमियत से बोल पड़ा – झंडे का क्या है ?  दोनों झंडे लगा  दो न ?? झंडे को लेकर भी कोई झगड़ा होता है अंकल ?? 
 एक बच्चे के मुंह से यह बात सुनकर मुझे लगा हम लोग बेकार ही बड़े हो गए ... बच्चे रहते तो बेहतर था। इतने समझदार तो बच्चे भी है जिनको लगता है की ये झगड़ा केवल झंडे को लेकर नही था। मैंने कहा कि बेटा बिल्कुल सही कहा तुमने, झगड़ा केवल झंडे का नहीं था, जय झगड़ा कुछ मुट्ठी भर सत्ता के लालची लोगों का है जो नहीं चाहते कि इस देश में प्रेम प्यार हो भाईचारा बना रहे। नफरत फैलाने से ही उनका घर चलता है। 

अकेले सरकार और प्रशासन को इस घटना का दोष देना बिल्कुल उचित नहीं है । कुछ दोष तो हमें अपने आपको भी देना ही होगा। जो कि ऐसी धर्मांधता को कहीं ना कहीं मन के भीतर बढ़ावा देते हैं। सरकार और प्रशासन ने तो राजस्थान में अपना काम कर ही दिया था , धार्मिक झंडे बिना अनुमति के ना लगाने के आदेश निकल कर। लेकिन हम लोगों ने उस समय सरकार को गाली देने का कोई मौका नहीं छोड़ा । गहलोत को तुष्टीकरण करने वाला बताया गया और आज जब धार्मिक चिन्हों वाले झंडे लगने की वजह से खराब हुए माहौल से ही जोधपुर में कर्फ्यू लगा है। तब यह बात कोई नहीं बोल रहा की सरकार ने पहले ही इस बात के लिए आम जनता को चेताया था और आदेश भी पारित किए थे। 

 2014 के बाद से राजनेताओं द्वारा अखबारों और न्यूज़ चैनलों में पैसे लगाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं रह गई है। और गहलोत विरोधियों ने भी ऐसे कई मीडिया संस्थानों में पैसे लगा रखे होंगे । जिनमें केवल भाजपाई ही नहीं बल्कि उनके धुर विरोधी कांग्रेस नेता भी शामिल है। मुख्यमंत्री के ऐसे शुभचिंतकों के आर्थिक योगदान से चल रहे मीडिया संस्थान वक्त वक्त पर अपने आर्थिक आकाओं के हित का संरक्षण करते रहते हैं। तो कम से कम ऐसी रद्दी छाप खबरों को देख कर गहलोत की कार्यक्षमता पर प्रश्न उठाना तो गलत ही होगा। 

 अब तो बेहतर होगा की जनता मौजूदा सरकार के पक्ष में ऐसा माहौल तैयार करे ताकि सरकार निडरता से इस घटना की तह तक जाकर, निष्पक्ष रूप से जाँच करवाए । और ऐसे अराजक तत्वों को पकड़ कर कानून ऐसी सजा दे, जो इतिहास में दर्ज हो सके । और लोग सदियों तक यह याद करें की सत्ता के लिए नफरत फैलाने वालों की सजा क्या होती है। सरकार यह भी सुनिश्चित करे की भविष्य में ऐसे पुनरावृति न हो । 

 जय श्री कृष्ण 

 नरेश राघानी 
9829070307

प्रधान संपादक 
Horizon Hind News 
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