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February 28, 2021
मौसम यही कहा करते हैं,
शजर अमीर हुआ करते हैं.
आसमान बस वही है मेरा ,
पंछी जहाँ उड़ा करते हैं.
सूख न जाएँ बूढ़ी शाखें,
पत्ते यही दुआ करते हैं.
कहाँ छिप गए याद के बच्चे,
चल के कहीं पता करते हैं.
जो न कही हो कभी किसी ने,
हम वो ग़ज़ल सुना करते हैं.
नदी,हवाएँ जान चुकी है,
हम जंगल में क्या करते हैं.
दिन में जाग के बाजारों में,
ख़्वाबों का सौदा करते हैं.
सुरेन्द्र चतुर्वेदी.
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