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December 30, 2020
ख़ुद को तकता रहता हूँ मैं,
बहुत पुराना कपड़ा हूँ मैं।
ख़ास क़िस्म के लोग हैं मेरे,
मयख़ाने का रस्ता हूँ मैं।
तुम अपनी बातें करते हो,
ख़ुद की बातें सुनता हूँ मैं।
याद मुझे रह जाते चेहरे,
एक अजब आईना हूँ मैं।
दैर ओ हरम में नहीं जो रहता,
उसके घर का कमरा हूँ मैं।
सब मुझको रखते हैं दिल में,
लेकिन फिर भी तन्हा हूँ मैं।
कई समन्दर पी डाले हैं,
कई जन्म का प्यासा हूँ मैं।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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