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क़लमकार: कोरोना अजमेर ज़िले में पूरी तरह हुआ निर्वस्त्र : आने वाले समय में आप सब को हो सकता है कोरोन

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September 4, 2020

डरें नहीं बहादुरी से लड़ें


कोरोना अजमेर ज़िले में पूरी तरह हुआ निर्वस्त्र : आने वाले समय में आप सब को हो सकता है कोरोन

डरें नहीं बहादुरी से लड़ें 

गिरीश बासानी के अनुभवों से हराएँ कोरोना को

( ब्लॉग बड़ा है मगर पूरा पढ़ें)
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
पिछले 5 महीने में जो लोग कोरोना से बच गए उन्हें प्रणाम करते हुए ईश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ। कोरोना काल में जिन लोगों ने जान गंवा दी उन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ। जिन्होंने कोरोना की चपेट में आने के बाद उसे छठी का दूध याद दिला दिया उन महान योद्धाओं को बधाई देता हूँ। ऐसे लोग जो कोरोना की लड़ाई में बहादुरी के साथ जनता का साथ देते रहे ,चाहे वे चिकित्सा कर्मी हों, पुलिसकर्मी हों,भामाशाह हों, पत्रकार हों या पब्लिक डीलिंग करने वाले बैंक कर्मचारी ,सभी को जिले भर की तरफ से मैं साधुवाद ज्ञापित करता हूँ
मैं इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा का भी आभार व्यक्त करता हूं जिनके प्रयासों से कोरोना की लड़ाई में गहलोत सरकार नाना प्रकार की गाइडलाइन निकालती रही।
जिला प्रशासन का मैं चरण स्पर्श करता हूँ।राजनेताओं की शान में मैं क्या कहूं ,मेरे पास शब्द नहीं।
दोस्तों !! यह ब्लॉग में चमचागिरी को समर्पित नहीं कर रहा ।इस ब्लॉग को लिखने का मेरा ख़ास मक़सद है। अब तक जो हुआ हो गया ।जिन्हें कोरोना की चपेट में आना था, आ गए। जिन्हें जाना था ,चले गए। अब जो बच गए हैं ,वे कैसे बचे रहें सवाल यह है और यह ब्लॉग में उन्हीं लोगों को समर्पित कर रहा हूँ।
बच पाना अब से इतना आसान नहीं !! आने वाले 1 महीने में अजमेर जिले का बहुत बुरा हाल होने वाला है। अजमेर शहर के अलावा केकड़ी, ब्यावर , किशनगढ़ , नसीराबाद , पुष्कर, मसूदा ,बिजयनगर ,पीसांगन आदि शहरों के हाल इतने ख़राब होने वाले हैं कि आप सोच नहीं सकते (वैसे आप सोचना भी नहीं चाहते और आपको सोचना भी नहीं चाहिए )
पिछले पांच महीनों में कोरोना आपके शरीर का एक बाल नहीं उखाड़ पाया तो आप यह सोचने लगे होंगे कि आगे भी वह आपका बाल बांका नहीं कर पाएगा ।यह ग़लतफ़हमी ही आप को ले डूबेगी।आप तार की बात कर रहे हैं आपका पूरा मीटर उखाड़ लेगा ये कोरोना।
यही गलतफहमी अजमेर के युवा व्यवसाई गिरीश बासानी को भी थी। संपन्न परिवार के इस युवा व्यवसाई ने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी । जमकर चवनप्राश खाए और परिवार वालों को भी खिलाए। खूब काढ़े पिए।तुलसी रस की दर्जनों शीशियां डकार गए।कितनी ही नीम गिलोय निगल गए। उनको यह ग़लतफ़हमी हो गई कि जिस तरह से वे खा पी रहे हैं, कोरोना उनके पास नहीं फटकेगा, मगर कोरोना ने उनको ऐसा पटका कि वे छठी का दूध भूल गए।
कारखाने में डिस्टेंसिंग का पालन करने में उनसे भूल हो गई और कोई उन्हें कोरोना का प्रसाद दे गया। उन्हें कोरोना हुआ तो पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया। उनके पिता, उनकी माता जी, सब कोरोना पॉजिटिव हो गए और तो और 80 वर्ष की उनकी दादी को भी कोरोना की शिकार हो गईं।
अजमेर के अमीर लोगों को जब कोरोना होता है तो वे अजमेर की चिकित्सा को दोहम मान कर जयपुर की तरफ भागते हैं। और तो और संभाग के सबसे बड़े निजी मित्तल अस्पताल के मालिक डॉक्टर दिलीप मित्तल , उनका प्रशासन, उनके घरवाले सभी जयपुर इलाज करवा कर लौटते हैं। बासानी भी जयपुर जाकर लाखों रुपए का चूना लगा कर लौटे। उनकी दादी का तो यह हाल हुआ कि उन्होंने जयपुर के निजी अस्पताल में मरने से अजमेर में मरना उचित समझा ।
अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। आप लोग ताज़्ज़ुब करेंगे कि डॉ संजीव माहेश्वरी और उनकी पत्नी मोनिका माहेश्वरी ने अथक प्रयासों से उन्हें बचा लिया ।आज पूरा परिवार नेगेटिव है।
यहां मैं आपको गिरीश बासानी के अनुभवों को साझा करना चाहता हूँ। उनके अनुभव का आपको बहुत लाभ मिलेगा। सारी गाइडलाइन एक तरफ बासानी की गाइडलाइन एक तरफ ।उनके मुताबिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आप जो कुछ भी कर रहे हैं करते रहें।उन से जितना फायदा मिलना होगा मिल जाएगा, मगर इसका फ़ायदा कोरोना हो जाने के बाद ज्यादा मिलता है।यह रोग ऐसा है कि इन के बावजूद भी आ धमकता है।
उनका कहना है रोग से डरें नहीं लड़े ।दूसरा पॉइंट ये कि डिस्टेंसिंग ही इस रोग का सबसे बड़ा बचाव है। यदि आपको आने वाले खतरनाक समय में जिंदा रहना है तो डिस्टेंसिंग का पालन करना ही पड़ेगा। सारी सावधानियां एक तरफ डिस्टेंसिंग एक तरफ ।मास्क लगाए बिना घर से बाहर ना आएँ। दिन में चार बार गर्म पानी की भाप खुद भी लें। घर के सदस्यों को भी दें। यह अमृत वटी है ।कोरोना होने पर जयपुर में इलाज के लिए नहीं भागें।वहां जो लाखों रुपए बर्बाद करके इलाज़ होगा उससे बेहतर इलाज़ अजमेर के नेहरू सरकारी अस्पताल में हो जाएगा। जयपुर के अस्पतालों में लूट मची हुई है। वहां सुविधाएं ज्यादा हो सकती हैं मगर सुरक्षा अजमेर में ही बेहतर है।बासानी के अनुभवों का लाभ उठाएं ।मेरी यही प्रार्थना है बाक़ी तो आप स्वयं बाहुबली हैं। बुद्धिमान हैं। चाहे जैसा करें।जो चाहे करें।


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