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June 10, 2017
रिपोर्ट- किसान आंदोलन अब कई राज्यों में है और कई में चिंगारी लिए हुए है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में हिंसा हो चुकी है तो राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा जैसे राज्यों में भी चिंगारी है। जाहिर है मुद्दा किसी एक राज्य विशेष का नहीं है। आज महाराष्ट्र में किसान परिवार के एक नौजवान ने आत्महत्या की। सारा मामला खेतों-किसानों की दशा और हालिया दो फसलों की किसान कमाई पर केंद्र सरकार की नोटबंदी के पाले की बदौलत है। इन किसानों को भाजपा व नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कर्ज माफी, आय दोगुनी का वायदा किया था। पर न किसान ने सोचा और न सरकार ने सोचा था कि ऐसा कुछ भी होगा जिससे उसे सोयाबीन, कपास, आलू, टमाटर या गेंहू किसी भी फसल को बेचने में दिक्कत होगी या मंडी में पहले हाथोहाथ नकद जो पैसा मिल जाया करता था वह मिलेगा नहीं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने गलती की जो गांव-देहात में बैंकों की जमीनी हकीकत को भूल केंद्र सरकार की चेक से पेमेंट पर खरीद के आदेश दिए। यो केंद्र का डंडा सौ फीसदी कैशलेस का था पर मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को पचास प्रतिशत नगद और आधी राशि आरटीजीएस के जरिए देने का ऐलान किया। पर यह भी हकीकत मे बेमतलब था। इसलिए कि राज्य के सहकारी बैंक कंगाली की हालत में हैं। रिजर्व बैंक से करेंसी की पर्याप्त आपूर्ति ही नहीं है। मंडियों में नगदी का संकट है। केवल एक मंडी में ही 90 करोड़ की फसल किसानों ने बेची और उन्हें भुगतान केवल सात करोड़ का हो पाया। ऐसे में किसान बौखलाएं नहीं तो करें क्या ? बैंकों में पर्याप्त राशि पहुंचाने का जिम्मा केन्द्र सरकार पूरा तो करा सकती है, मगर उससे कहे कौन? दिल्ली की मोदी सरकार ने आज इतना खौफ बना रखा हा कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी उसे यह आईना दिखाने की स्थिति में नहीं है कि गरीब- किसान, गांव में व्यवहार नकदी में होगा।
प्रदेश में नौंवे दिन भी किसानों का आंदोलन जारी रहा। राजधानी के आसपास काफी उपद्रव हा। आंदोलनकारियों ने ट्रक समेत कई वाहन फूंक डाले। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आंदोलन अब अराजक हो गया है। शनिवार को किसान प्रदेशभर में जेलभरो आंदोलन करेंगे तो उधर शिवराज सिंह भोपाल के दशहरा मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठकर चर्चा के लिए किसानों के आने का इंतजार करेंगे। यह स्थिति आज की है। लेकिन एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के डर ने व्यापारियों को भी खदबदा दिया है। जुलाई से पहले ही व्यापारियों ने गोदाम खाली कर लिए हैं। किसान संघ औऱ व्यापारी संघ मिलकर बैठकें करने लगे हैं जो आगे चलकर आंदोलन को और उग्र बना सकते हैं।
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