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January 18, 2026
मौनी अमावस्या के दुर्लभ योग पर पुष्कर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने सरोवर में लगाई डुबकी
धार्मिक नगरी पुष्कर में माघ मास की मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को अमावस्या के दुर्लभ संयोग के चलते अलसुबह से ही हजारों श्रद्धालु पुष्कर सरोवर के पावन घाटों पर पहुंच गए। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों का स्मरण किया और पिंडदान व तर्पण कर आत्मशांति की कामना की।
पंडित दिलीप शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास की अमावस्या अक्षय फल प्रदान करने वाली होती है। शास्त्रों में मौनी अमावस्या पर मौन रहकर तीर्थ स्नान, दान और पुण्य कर्म करने का विशेष महत्व बताया गया है, जिसका उल्लेख महाभारत पर्व में भी मिलता है। साथ ही मौनी अमावस्या से द्वापर युग के प्रारंभ का वर्णन भी ग्रंथों में मिलता है। मौनी अमावस्या के अवसर पर पुष्कर सरोवर के बावन घाटों, विशेषकर वराह घाट, ब्रह्म घाट, राम घाट, मुख्य गऊ घाट और प्रधान वराह घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण किया तथा ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान देकर परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। बाजारों में भी मेले जैसा माहौल नजर आया। विशेष बात यह रही कि जिन श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं थी, उन्होंने भी मौनी अमावस्या के पावन अवसर का लाभ उठाया। तर्पण और पिंडदान को लेकर हर वर्ग और आयु के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पंडित कैलाश दाधीच ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रखकर तीर्थ में स्नान, दान और पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस दिन पुष्कर तीर्थ में स्नान, दान, पुण्य, व्रत, परिक्रमा, मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं कालसर्प पूजन का भी विशेष विधान है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि पांडव पुत्र भीम ने भी मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखा था, जिसके पुण्य प्रभाव से वे बलशाली गदाधारी बने और अधर्म पर धर्म तथा असत्य पर सत्य की विजय का संदेश विश्व को दिया। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर पुष्कर में श्रद्धा, आस्था और अध्यात्म का संगम देखने को मिला, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।
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