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January 20, 2026
SIR पर गरमाई सियासत: कांग्रेस का बड़ा आरोप—बीजेपी के इशारे पर नियमों को ताक पर रखकर चल रही SIR प्रक्रिया,
पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर और कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल ने की पत्रकार वार्ता
अजमेर। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जिले की राजनीति में घमासान और तेज हो गया है। कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के बजाय नियमों को दरकिनार कर सुनियोजित तरीके से फर्जी आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, ताकि वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।इन्हीं आरोपों को लेकर RTDC के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा घटनाक्रम—बीजेपी BLA राधेश्याम का दावा कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी के बीएलए राधेश्याम (बूथ संख्या 72) स्वयं मौके पर पहुंचे और उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से किसी भी आपत्ति पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। राधेश्याम के इस बयान के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यदि BLA अपने हस्ताक्षर से इनकार कर रहा है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है और फर्जी आपत्तियों की आशंका को बल मिलता है।
कांग्रेस का आरोप—बीजेपी के इशारे पर फर्जी आपत्तियों की बाढ़
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचन नियमों को ताक पर रखकर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी आपत्तियां डाली जा रही हैं। उनके अनुसार अजमेर उत्तर के निर्वाचन अधिकारी द्वारा 4,000 से अधिक प्रपत्र-7 सीधे बीजेपी के अधिकृत बीएलए से प्राप्त कर सभी बीएलओ को भेज दिए गए, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
कांग्रेस का यह भी दावा है कि 10,000 से अधिक प्रपत्र-7 ऑफलाइन भी लिए गए, जिन्हें बीजेपी के इशारे पर निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों द्वारा स्वीकार किया गया। इन प्रपत्रों के जरिए एससी, एसटी और मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाते हुए उनके नामों पर फर्जी आपत्तियां दर्ज कर हटाने की कोशिश की जा रही है।
नियमों की खुलेआम अनदेखी—बिना एफिडेविट, बिना पहचान
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नियमों के मुताबिक प्रपत्र-7 के साथ शपथपत्र (एफिडेविट) अनिवार्य है और एक व्यक्ति द्वारा 10 से अधिक आपत्तियां देना कानूनन निषिद्ध है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा बिना हस्ताक्षर, बिना नाम-पता और बिना मोबाइल नंबर वाले प्रपत्र-7 स्वीकार किए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में प्रपत्र-7 की प्रिंटिंग कहां हुई और किसके निर्देश पर कराई गई, इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हो रही।
बूथ और वार्ड स्तर पर गड़बड़ियों के आरोप
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि वार्ड संख्या 11 की पार्षद शाहजहां बीवी के नाम पर ही आपत्ति दर्ज कर दी गई, जबकि उनके वार्ड के हर बूथ पर 250 से 300 आपत्तियां दर्ज होना बाहरी हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।
इसी तरह बूथ संख्या 162 में मेराज खान और उनके परिवार सहित कई अन्य परिवारों के खिलाफ एक ही व्यक्ति द्वारा आपत्तियां जमा कराई गईं। संबंधित व्यक्ति ने बयान दिया कि उसकी जानकारी के बिना आपत्ति फार्म पर हस्ताक्षर कराए गए। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसने SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनवाई और समय-सीमा पर भी सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नियमानुसार आपत्तियों पर 7 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए, लेकिन कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि—
निर्णय किस तारीख से किस तारीख के बीच लिया गया,
प्रभावित मतदाताओं को न तो समुचित सूचना दी गई,
और न ही सुनवाई का अवसर दिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि SIR के नाम पर फर्जी आपत्तियों, डुप्लीकेशन और मनमानी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
राठौर और जयपाल का सीधा आरोप
राठौर और जयपाल ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में जिले में वैधानिक, जीवित और पात्र मतदाताओं के नाम काटने की साज़िश की जा रही है। Form-7 के जरिए झूठी आपत्तियां लगाकर, बिना नोटिस और बिना सुनवाई के नाम हटाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि चाहे निर्वाचन अधिकारी हो, BLO-BLA हो या किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि—यदि कोई मतदाता का नाम अवैध रूप से कटवाने में शामिल है तो वह लोकतंत्र का हत्यारा है। कानून के तहत बिना जांच और सुनवाई नाम काटना अपराध है और ऐसे मामलों में FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस की मांगें
कांग्रेस ने मांग की कि—
सभी संदिग्ध और फर्जी प्रपत्र-7 की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए,
नियमों के विपरीत दर्ज सभी आपत्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए,
जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत सूची में पुनः जोड़ा जाए,
SIR प्रक्रिया को पूरी तरह कानून और नियमों के अनुरूप संचालित किया जाए।
कड़ी चेतावनी
राठौर और जयपाल ने साफ कहा कि SIR के नाम पर यदि एक भी वैध मतदाता का नाम अवैध रूप से काटा गया, तो इसे राजनीतिक साज़िश मानते हुए सड़क से लेकर अदालत तक आंदोलन और कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
SIR को लेकर सामने आए इन आरोपों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए घटनाक्रम के बाद जिले का राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाने के आसार हैं।
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