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October 15, 2026
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया अजमेर पहुंचे कुछ देर सर्किट हाउस में रुकने के बाद, श्री सम्मेद शिखरजी के दर्शन के लिए हुए रवाना
अजमेर। पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया 15 अक्टूबर को अजमेर पहुंचे। अजमेर पहुंचने के बाद वे जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी के दर्शन के लिए रवाना हो गए। उनके इस दौरे को धार्मिक यात्रा के रूप में देखा जा रहा है।देश में लगातार भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं के बढ़ते विरोध प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच अजमेर पहुंचे राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए एक बड़ा और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि पेपर लीक होना अभ्यर्थियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है और इसका स्थायी समाधान निकाला जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने सम्मेद शिखरजी यात्रा और समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के साथ सम्मेद शिखरजी के दर्शन करने जा रहे हैं। अजमेर उनका पुराना कार्यक्षेत्र रहा है, हालांकि जिम्मेदारियां बदलने की वजह से अब उनका यहाँ आना कम ही होता है।
देश भर में युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले पर अपनी बेबाक राय रखते हुए उन्होंने माना कि यह विद्यार्थियों के लिए एक बहुत गंभीर और दुखद समस्या है। पेपर आउट होना वास्तव में विद्यार्थी के लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है, इसमें कोई दो राय नहीं है। मैंने विधानसभा में भी यह स्वीकार किया था कि मेरे मंत्री रहते हुए भी पेपर आउट हुए थे। मैं यह अभिमान नहीं करता कि मेरे समय पेपर लीक नहीं हुए। लेकिन यह सिलसिला लगातार चल रहा है। जो बच्चा गरीबी में पढ़ता है, मां-बाप पेट काटकर, मकान या जमीन गिरवी रखकर पढ़ाते हैं और फिर खबर आती है कि पेपर रद्द हो गया—उस बच्चे की पीड़ा को समझने का प्रयास करना चाहिए। इसका स्थायी हल निकालने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। केवल भाषण देने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा।
आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के तरीकों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा और अराजकता से किसी का भला नहीं होने वाला।
राजनीति में हर किसी का अपना दृष्टिकोण होता है। लेकिन कानून-व्यवस्था तोड़कर या हिंसा फैलाकर अगर कोई सफलता पाई भी जाए, तो उससे जनता को कुछ हासिल नहीं होगा। अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से उठानी चाहिए। आपातकाल के दौरान भी जयप्रकाश नारायण जी ने लोकतांत्रिक आंदोलन के जरिए युवाओं को जगाया था। अगर आपका विषय सही है तो उसे सही मंच और तरीके से उठाएं, हिंसा के रास्ते पर जाकर किसी मासूम बच्चे की जान दांव पर न लगाएं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से हटकर पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे का स्थायी समाधान ढूंढना होगा ताकि गरीब और मेहनती छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
चुनाव जीतने के बाद एक जनप्रतिनिधि की क्या भूमिका होनी चाहिए और उसकी असली जिम्मेदारी किसके प्रति है? इस सवाल पर बोलते हुए उदयपुर के विधायक
गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि मेरी तो यही मान्यता है कि हम सब जनता के प्रतिनिधि हैं। चुनाव जीतने के बाद मैं केवल बीजेपी का विधायक नहीं रहता, मैं उदयपुर की पूरी जनता का विधायक कहलाता हूँ। इसका मतलब यह है कि मुझे उस पद की गरिमा को बनाए रखते हुए कार्य करना चाहिए। चाहे सही काम किसी का भी आए, उसे जरूर करना चाहिए और गलत काम आए तो अपने लोगों का भी नहीं करना चाहिए। कोई चले या न चले, मैं इस सिद्धांत पर चला हूँ और जब तक जिंदा हूँ, तब तक इसी पर चलूँगा।
उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनका कर्तव्य पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जनता के सही कार्यों को पूरा करना है, न कि गलत कामों को शह देना। अपने सिद्धांतों पर कायम रहने का यह संदेश जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा नज़ीर प्रस्तुत करता है।
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