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October 14, 2026
स्नैपचैट पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर नाबालिग से दोस्ती, दुष्कर्म के आरोपी को मिली 20 साल की सजा।
अजमेर पोक्सो कोर्ट संख्या 2 ने आरोपी पर ठोका 50 हजार का जुर्माना, पीड़िता को 6 लाख रुपये प्रतिकर राशि देने का आदेश।
बर्थडे पार्टी के बहाने होटल ले जाकर नशीली दवा पिलाई, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर दी थी धमकी।
सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग बच्चों को झांसे में लेकर अपराध की वारदात को अंजाम देने वाले अपराधियों के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। पोक्सो कोर्ट संख्या 2 के न्यायधीश ने 16 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पीड़िता को विधिक सहायता की ओर से 6 लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने का भी आदेश जारी किया गया है।विशेष लोक अभियोजक संजय कुमार तिवारी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रकरण अक्टूबर 2024 का है। पीड़िता, जो कि 16 साल की नाबालिग बच्ची थी, उसे आरोपी स्नैपचैट के माध्यम से बार-बार फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता था। शुरुआत में पीड़िता ने रिक्वेस्ट को नजरअंदाज किया, लेकिन आरोपी ने फोन करके दबाव बनाया, जिसके बाद पीड़िता ने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली।
इसके बाद स्नैपचैट पर बातचीत के दौरान एक दिन आरोपी ने पीड़िता को अपने जन्मदिन की पार्टी में आने का न्योता दिया। पीड़िता के मना करने पर आरोपी ने मिलने का दबाव बनाया और उसे घर के पास से अपनी गाड़ी में बैठाकर एक होटल ले गया। होटल में आरोपी ने पीने के पानी में बेहोशी की दवा मिलाकर पीड़िता को पिला दी और उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
वारदात के बाद आरोपी ने दुष्कर्म और बेहोशी के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया, तो वह वीडियो वायरल कर देगा। सहमी हुई बच्ची के गुमसुम रहने पर जब परिजनों ने प्यार से पूछताछ की, तो उसने पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजनों के साथ थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया गया।
मामले में जांच के बाद 12 दिसंबर 2024 को अदालत में चालान पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल 18 गवाह और 49 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पोक्सो एक्ट की धारा 5L/6 के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
माननीय न्यायालय ने अभियुक्त को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने के अर्थ दंड की सजा से दंडित किया है। साथ ही पीड़िता को 6 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश दिया है। आज के दौर में स्नैपचैट, इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर युवा पीढ़ी और नाबालिग बच्चों में जागरूकता और सावधानी की बहुत आवश्यकता है।
अदालत के इस फैसले से जहां पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, वहीं यह मामला अभिभावकों और युवाओं के लिए भी एक बड़ी सीख है कि सोशल मीडिया पर अंजान लोगों से दोस्ती करते समय पूरी सावधानी और सतर्कता बरतें।
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