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October 14, 2026
सीकर। जिले के करीब 40 फीसदी सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बंद हो गया है। वजह यह है कि खाद्यान्न और कन्वर्जन राशि समय पर नहीं पहुंची। कई स्कूलों में न अनाज बचा है और न भोजन पकाने के लिए पैसा, जिससे बच्चों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था ठप पड़ गई है। भोजन पकाने वाली कुक कम हेल्पर को आठ महीने से मानदेय नहीं मिला है। शिक्षक संगठनों ने सरकार से जल्द पोषाहार की व्यवस्था करने की मांग की है।
क्या कब तक मिला
| मद | कब तक |
|---|---|
| खाद्यान्न (अनाज) | सितंबर तक |
| कन्वर्जन राशि (सब्जी, मसाले और अन्य सामग्री के लिए) | कहीं अप्रैल तक, कहीं जून-जुलाई तक |
| दूध पाउडर (पन्नाधाय बाल गोपाल योजना) | सितंबर तक |
| कुक कम हेल्पर का मानदेय | आठ महीने से नहीं मिला |
बढ़े हुए नामांकन की वजह से कई स्कूलों में सितंबर का अनाज पूरा महीना भी नहीं चल पाया। जहां थोड़ा-बहुत अनाज बचा, वहां भोजन पकाने के लिए राशि नहीं थी।
पहले एक-दूसरे से अनाज लेकर काम चलाया, अब वह भी नहीं
खाद्यान्न खत्म होने पर पहले स्कूलों ने आपस में अनाज लेकर काम चलाया। भामाशाहों के साथ शिक्षकों ने भी अपनी ओर से सहयोग किया। लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकी और अब वह भी बंद होती जा रही है।
दूध योजना पर भी असर
स्कूलों में बच्चों को दूध देने वाली पन्नाधाय बाल गोपाल योजना भी प्रभावित है। स्कूलों को दूध पाउडर भी सितंबर तक का ही मिला था, जिससे सैकड़ों स्कूलों में दूध वितरण पर संकट है।
यह योजना नवंबर 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के नाम से शुरू की थी। सितंबर 2024 में मौजूदा सरकार ने इसका नाम बदलकर पन्नाधाय बाल गोपाल योजना कर दिया, बाकी प्रावधान वही रखे गए। इसके तहत कक्षा एक से आठ तक के करीब 68 लाख बच्चों को दूध पाउडर दिया जाता है — कक्षा एक से पांच तक 15 ग्राम पाउडर से बना 150 मिलीलीटर और कक्षा छह से आठ तक 20 ग्राम से बना 200 मिलीलीटर दूध।
गहलोत ने एक्स पर उठाया मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा कि सीकर के करीब 40 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का राशन खत्म हो गया है, जुलाई के बाद न खाद्यान्न मिला न राशि, और बच्चों का दूध भी सितंबर के बाद बंद है।
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