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राजस्थान न्यूज़: पंचायत चुनाव: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिना वेतन छुट्टी लेकर लड़ सकेंगी, संविदाकर्मी और आशा सहयोगिनी को देना होगा इस्तीफा

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October 10, 2026

प्रदेश में नामांकन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए यह स्पष्टीकरण उम्मीदवारों के लिए सीधे काम का है।

जयपुर। प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बिना वेतन अवकाश लेकर पंच-सरपंच तथा जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी अपने पदों पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव लड़ने से जुड़े मामलों में सभी कलेक्टरों को आदेश जारी किए हैं।आदेश में राशन डीलर के पद को लाभ का पद नहीं माना गया है और उन्हें चुनाव लड़ने की छूट दी गई है। प्रदेश में नामांकन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए यह स्पष्टीकरण उम्मीदवारों के लिए सीधे काम का है।

किस पद पर क्या स्थिति

पदचुनाव लड़ सकते हैं?शर्त
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाहांबिना वेतन अवकाश लेकर चुनाव लड़ सकती हैं
राशन डीलरहांइसे लाभ का पद नहीं माना गया
संविदा कर्मचारीनहींइस्तीफा देना होगा, मंजूर होने के बाद ही चुनाव लड़ सकेंगे
आशा सहयोगिनीनहींइस्तीफा देना होगा, मंजूर होने के बाद ही चुनाव लड़ सकेंगी
विद्या संबल योजना कर्मीजांच के बादआरओ नियुक्ति पत्र और वेतन देखेगा, संदेह पर इस्तीफा लेना सही रहेगा
प्रशासक लगे सरपंचकसौटी पर तयसुप्रीम कोर्ट के मानकों के आधार पर तय होगा

संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी को देना होगा इस्तीफा

आयोग ने संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी के पद को लाभ का पद माना है। इन्हें पंचायतीराज चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा देना होगा और इस्तीफा मंजूर होने के बाद ही वे चुनाव लड़ सकेंगे।आयोग ने कहा कि लाभ के पद पर रहते हुए कोई व्यक्ति पंचायती राज संस्था का चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में प्रदेश में काम कर रहे संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी बिना इस्तीफा दिए पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते।

विद्या संबल योजना कर्मियों के लिए जांच का रास्ता

आयोग ने कहा कि विद्या संबल योजना में काम करने वालों को लेकर कोई अदालती आदेश उपलब्ध नहीं है, लेकिन इन्हें सरकार से वेतन मिलता है। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी इनके नियुक्ति पत्र और वेतन आदि की जांच करेगा। किसी भी तरह का संदेह होने पर चुनाव लड़ने से पहले इनका इस्तीफा लिया जाना सही रहेगा।

राशन डीलर को 2014 के हाईकोर्ट फैसले से राहत

आयोग के अनुसार राशन डीलर को चुनाव लड़ने की अनुमति राजस्थान हाईकोर्ट के साल 2014 के फैसले के आधार पर दी गई है। मांगी देवी बनाम राजस्थान सरकार के मामले में सरपंच चुनाव के नामांकन को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि उम्मीदवार राशन की दुकान चला रहा था और उसके खिलाफ जांच चल रही थी। हाईकोर्ट ने तब कहा था कि केवल इस आधार पर उसे अयोग्य नहीं माना जा सकता।

प्रशासक लगे सरपंचों पर सुप्रीम कोर्ट की कसौटी

प्रशासक लगे सरपंचों के चुनाव लड़ने पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर निर्णय करने को कहा है। आयोग ने जिस तरह के सवालों पर विचार करने को कहा है, उनके आधार पर प्रशासक लगे सरपंचों को चुनाव लड़ने से पहले इस्तीफा देने को कहा जा सकता है।

प्रशासकों के मामले में ये पांच बातें देखी जाएंगी

  1. क्या उनकी नियुक्ति सरकार ने की है?
  2. क्या सरकार के पास उन्हें हटाने का अधिकार है?
  3. क्या उस पद से वेतन, मानदेय या कोई आर्थिक लाभ जुड़ा है?
  4. उनके कामों की प्रकृति क्या है?
  5. उस पद पर सरकार का कितना नियंत्रण रहता है?

जया बच्चन बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यह निर्णायक नहीं है कि वास्तव में कोई आर्थिक लाभ मिला या नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित पद आर्थिक लाभ या मानदेय देने में सक्षम है या नहीं। आयोग ने कहा कि किसी भी प्रकार का संदेह होने पर सरकार से जारी नियुक्ति पत्र और सेवा शर्तों को देखा जाए।


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