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October 1, 2026
सवाल हम चुनाव आयोग से पूछ रहे हैं, जवाब देने भाजपा क्यों आ रही है? भाजपा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रवक्ता है या एजेंट? डॉ. राजकुमार जयपाल
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल ने भाजपा अजमेर शहर की प्रेस वार्ता पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस ने सवाल सीधे देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से पूछे हैं, भाजपा से नहीं। फिर भाजपा बार-बार अपनी पीठ थपथपाने और आयोग की तरफ से वकालत करने क्यों मैदान में कूद रही है? क्या भाजपा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रवक्ता बन गई है या उनकी बी-टीम (एजेंट) के रूप में काम कर रही है? भाजपा के नेताओं को यह समझना चाहिए कि वे देश की संवैधानिक सस्था के पैरोकार नहीं, बल्कि जनता की आखों में धूल झोंकने वाले कठपुतली है। भाजपा 100 बार झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रही है जनता सब समझती है। डॉ. जयपाल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा बेशर्मी से 100 बार झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने का कुत्सित प्रयास कर रही है। देश की पारदर्शी चुनावी व्यवस्था पर कालिख पोतने और अपनी नाकामियो को छुपाने के लिए भाजपा नेता दिन-रात अनर्गल प्रलाप कर रहे है। भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनता और विपक्ष को गुमराह करने का उसे किसने हक दिया है? जो गंभीर त्रुटियां और धंधलियां चुनाव प्रक्रिया में सामने आई है, उनके लिए भाजपा को देश की जनता से तुरंत सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। हद तो तब हो गई जब संवैधानिक संस्थाओं को सत्ता के इशारे पर कठपुतली बनाया गया, जिसके नैतिक दायित्व के चलते प्रधानमंत्री को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। डॉ. जयपाल ने दो टूक कहा कि भाजपा नेता कांग्रेस से सबूत मांग रहे हैं, जबकि सच यह है कि कांग्रेस जिन सवालों को उठा रही है, वे किसी कल्पित कहानी पर नहीं, बल्कि The Indian Express की गहन जांच में बेनकाब हुए निर्वाचन आयोग के आंतरिक दस्तावेजों और खुद दो निर्वाचन आयुक्तों की लिखित आपत्तियों पर आधारित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग की कार्यप्रणाली, निर्णयों और प्रक्रियाओं पर गंभीर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में जो खेल खेला गया, उसका पर्दाफाश हो चुका है।सब कुछ पारदर्शी था, तो दो निर्वाचन आयुक्तों को बार-बार गंभीर लिखित आपत्तियां क्यों दर्ज करानी पड़ीं? Form-8 में SIR से जुड़ा अतिरिक्त और अवैध प्रावधान किस अधिकार से और किसके इशारे पर जोड़ा गया? स्वयं निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने बाद में इस बदलाव को 'अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग क्यों की थी?
आयोग का खुद फैसला बदलना भाजपा के मुंह पर करारा तमाचा
डॉ. जयपाल ने जोर देकर कहा कि 30 सितंबर को स्वयं निर्वाचन आयोग द्वारा SIR पूरा हो चुके राज्यों में Farm से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाए जाने का निर्णय सामने आ चुका है। जब आयोग ने खुद मान लिया कि वह प्रावधान गलत था और उसे हटाया गया, तो अब भाजपा किस मुंह से कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों को गलत बता रही है? यह इस बात का पुख्ता प्रमान है कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
राहुल गांधी के उठाए गए हर एक आंकडे और दस्तावेज पर चुप्पी क्यों?
डॉ. जयपाल ने कहा कि राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और धांधलियों को लेकर बार-बार पुख्ता आंकडे, दस्तावेजी सबूत और उदाहरण देश के सामने रखे हैं। लेकिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा के पेट में मरोड़ उठ रही है क्योंकि उनका सच सामने आ चुका है। कांग्रेस मांग करती है कि इन सभी गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक जांच हो, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त हर एक सवाल का बिंदुवार तथ्यात्मक जवाब दें।
भाजपा और ज्ञानेश कुमार को देना होगा जनता को जवाब-
'हम सवाल देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से पूछ रहे हैं. जवाब देने भाजपा क्यों आगे आ रही है? क्या भाजपा चुनाव आयोग की बी-टीम या प्रवक्ता है? अगर भाजपा में जरा भी नैतिकता बची है, तो वह हमारे सवालों का झूठा बचाव करने के बजाय आयोग से पारदर्शी और दस्तावेजी जवाब दिलवाए।" डॉ. जयपाल ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र की रक्षा मतदाता के अधिकारों और चुनावी शुचिता के लिए अपनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। भाजपा के झूठे बयानों और गुमराह करने वाले हथकंडों से कांग्रेस न डरी है, न कभी पीछे हटेगी। जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार इन गंभीर सवालों पर सतोषजनक जवाब नहीं देते, कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।
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