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September 27, 2026
रियासत राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन सैय्यद फरीद महाराज चिश्ती के जरिए सुल्तान उल हिंद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की फिक्र और उनके फलसफे " मोहब्बत बतौर ए मुजाहिमत " पर एक किताब लिखी गई है। अजमेर दरगाह के खुद्दाम ए ख्वाजा जमात में खानदानी रुतबा रखने वाले मुसन्निफ़ सैय्यद फरीद महाराज चिश्ती का कहना है कि मौजूदा हालात और नई नस्ल को सूफिज्म,तसव्वुफ़ और चिश्तिया सिलसिले के अदबो एहतेराम की मालूमात होना जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने जदीद जम्हूरी निज़ाम में चिश्तिया मिशन के तहत अपनी बुनियादी मरकज़ यानी आज़ादी और खुद मुख्तारी को तन्हाई इख्तियार किए बग़ैर दर्ज़-जेल अमली तरीको के जरिए महफूज़ रखने का पैग़ाम दिया है। महाराज चिश्ती ने बताया कि उनके जरिए लिखी गई इस किताब का अस्ल मक़सद ओलिया इकराम,वलीअल्लाह के दरबार में हाजिरी का सलीका तरीका और अदब समझाना है और मिशन ए चिश्तिया को फरोग देना है। उन्होंने कहा कि किताब के आख़िरी हिस्से में क़ुरुन ए वुस्ता हिंद से लेकर आलमी दुनिया में चिश्तिया सिलसिले में सियासत को कितना तवज्जो दिया जाता है और जदीद जम्हूरी मुआशरा में सेकुलरिज्म,इंसानी हुक़ूक़ और आईनी हुब्बुल वतनी में ढल जाता है। महाराज चिश्ती ने वाज़े किया कि सूफिज्म का अस्ल मक़सद हर इंसान से मोहब्बत है। बच्चे से प्यार,मोहब्बत, बुजुर्गों और ख्वातीन की इज़्ज़त एहतेराम का सबक देता है। चिश्तिया मिशन इंसानियत के साथ साथ खिदमते खल्क का मज़बूत पिलर है जिसकी राह पर चल कर अल्लाह को राज़ी किया जा सकता है।मुसन्निफ़ सैय्यद फरीद महाराज चिश्ती की लिखी इस किताब को हिंदी,उर्दू इंग्लिश के अलावा दीगर लैंग्वेज की शक्ल में भी जल्द पेश किया जायेगा।
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