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September 16, 2026
मेयर पद के लिए तीन दावेदारों के चार नामांकन, नवरतन डागा ने कांग्रेस और निर्दलीय के रूप में भरे दो पर्चे, कांग्रेस के पास 42 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत फिर भी आंतरिक चुनौती
बीकानेर। नगर निगम में मेयर पद के चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने वार्ड नंबर 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि टिकट की दावेदारी कर रहे वार्ड नंबर 50 के कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने भी चुनाव मैदान में उतरते हुए नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को मेयर प्रत्याशी बनाया है। इस तरह नामांकन के बाद बीकानेर में तीन चेहरे मेयर पद की दौड़ में सामने आए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में भी अनिल कल्ला को कांग्रेस और सुरेंद्र सिंह शेखावत को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बताया गया है, जबकि डागा के बागी होकर मैदान में उतरने की पुष्टि हुई है। बीकानेर नगर निगम में इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 80 वार्डों में कांग्रेस के 42 पार्षद, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ है। यानी बहुमत के लिए आवश्यक 41 मतों से कांग्रेस एक सीट आगे है। इसके बावजूद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ अपने ही पार्षद के मैदान में उतरने से कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की राजनीतिक चुनौती खड़ी हुई है।
अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार
कांग्रेस ने लंबे मंथन और पार्षदों से रायशुमारी के बाद अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगाई है। अनिल कल्ला वार्ड नंबर 73 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। चुनाव परिणाम में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर यह सीट जीती थी। मेयर प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस में अनिल कल्ला के अलावा नवरतन डागा, जावेद पड़िहार, दिलीप बांठिया, मकसूद अहमद और अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में रहे थे। बुधवार को अधिकृत पार्टी सिंबल अनिल कल्ला को मिलने के बाद पार्टी का फैसला साफ हो गया।
टिकट नहीं मिला तो नवरतन डागा ने खोला मोर्चा
वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित नवरतन डागा भी कांग्रेस की ओर से मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। पार्टी की ओर से अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डागा ने अलग रास्ता अपनाते हुए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। डागा वार्ड 50 से कांग्रेस के टिकट पर 312 मतों के अंतर से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। डागा ने टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए कल्ला परिवार को बार-बार राजनीतिक अवसर मिलने का मुद्दा उठाया है। स्थानीय राजनीतिक रिपोर्टों में उनकी नाराजगी को मेयर टिकट से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उनके मैदान में बने रहने या नाम वापसी की अंतिम स्थिति 18 सितंबर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी।
नवरतन डागा ने भरे दो नामांकन
नामांकन प्रक्रिया में नवरतन डागा की ओर से दो पर्चे जमा किए गए हैं। एक नामांकन में उन्होंने स्वयं को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में और दूसरे में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया है। चूंकि कांग्रेस का अधिकृत चुनाव चिह्न अनिल कल्ला को दिया गया है, इसलिए डागा के कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दाखिल पर्चे की स्थिति नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी द्वारा तय की जाएगी। नामांकन संबंधी सामने आए विवरण के अनुसार डागा के दोनों पर्चों में निर्दलीय पार्षद प्रस्तावक बने हैं। एक नामांकन में वार्ड 72 की निर्दलीय पार्षद निशा पारीक और दूसरे में वार्ड 63 के निर्दलीय पार्षद दीपक तंवर प्रस्तावक बताए गए हैं। दोनों का निर्दलीय पार्षद के रूप में निर्वाचन हुआ है। वहीं कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के प्रस्तावक कांग्रेस पार्षद नवल किशोर पुरोहित बताए गए हैं। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के प्रस्तावक के रूप में दीपक व्यास का नाम सामने आया है।
भाजपा ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को बनाया प्रत्याशी
भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को बीकानेर मेयर चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। वार्ड 13 में शेखावत भाजपा के टिकट पर 1,628 मत प्राप्त कर विजयी हुए थे। भाजपा के पास निगम में 27 पार्षद हैं, इसलिए मेयर चुनाव में उसे अपने पार्षदों के अतिरिक्त दूसरे निर्वाचित सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।भाजपा की ओर से इससे पहले भगवान सिंह मेड़तिया सहित कुछ अन्य नाम भी चर्चा में थे, लेकिन आखिरकार पार्टी ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को अधिकृत प्रत्याशी बनाया।
सिंबल को लेकर नामांकन के समय बनी असहज स्थिति
भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के नामांकन के दौरान पार्टी सिंबल से जुड़ी एक स्थिति भी चर्चा में रही। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार शेखावत नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो अधिकृत पार्टी सिंबल तत्काल उनके साथ नहीं था। इसके चलते उन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ा। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यप्रकाश आचार्य अधिकृत दस्तावेज लेकर पहुंचे, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई।
कांग्रेस के पास बहुमत, लेकिन बगावत ने बढ़ाई चुनौती
संख्या के लिहाज से बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट है। उसके 42 निर्वाचित पार्षद हैं और बहुमत का आंकड़ा 41 है। लेकिन नवरतन डागा का अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतरना पार्टी के लिए अब संगठनात्मक अनुशासन और पार्षदों की एकजुटता का सवाल बन गया है। दूसरी ओर भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। ऐसे में उसे मेयर पद के लिए आवश्यक संख्या तक पहुंचने के लिए काफी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। निर्दलीय पार्षदों और कांग्रेस के भीतर पैदा हुई असहमति के कारण दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन वास्तविक समर्थन का पता मतदान में ही चलेगा।
वार्ड 50 पहले भी रहा था चर्चा में
नवरतन डागा जिस वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित हुए हैं, वहां कांग्रेस टिकट वितरण के समय भी विवाद सामने आया था। डागा अंततः कांग्रेस उम्मीदवार बने और चुनाव जीतकर निगम पहुंचे। चुनाव परिणामों में उन्हें 1,288 वोट मिले और उन्होंने 312 वोट से जीत हासिल की। अब मेयर टिकट नहीं मिलने के बाद उनका निर्दलीय पर्चा दाखिल करना कांग्रेस के भीतर असंतोष को औपचारिक चुनावी मुकाबले तक ले आया है।
17 को नामांकन की जांच, 18 तक नाम वापसी
मेयर चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसलिए अभी यह तय नहीं है कि 21 सितंबर के मतदान तक तीनों प्रत्याशी मैदान में बने रहेंगे या किसी स्तर पर राजनीतिक समझौता होगा। बीकानेर में महापौर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को निर्धारित है। फिलहाल कांग्रेस के अनिल कल्ला, भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत और बागी नवरतन डागा के नामांकन ने बीकानेर मेयर चुनाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। अंतिम मुकाबले की तस्वीर नामांकन जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
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