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September 16, 2026
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष, 11 पार्षदों के साथ आने का दावा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले— स्थिति स्पष्ट करने के लिए पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं
खैरथल। नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद खैरथल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस से सभापति पद के संभावित दावेदारों में शामिल रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष विक्रम चौधरी ‘विक्की’ ने भाजपा का दामन थाम लिया है। दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर चौधरी की भाजपा में एंट्री हुई। उनके साथ कई निर्वाचित पार्षदों के भी भाजपा खेमे में आने की खबर है, जिससे नगर परिषद में बोर्ड गठन का संख्या गणित बदल गया है।खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 20, भाजपा ने 8 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की थी। बोर्ड के लिए 23 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।
दिल्ली पहुंचकर भाजपा में शामिल हुए विक्रम चौधरी
विक्रम चौधरी की भाजपा में एंट्री दिल्ली में हुई। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उनका पार्टी में स्वागत किया। चौधरी इससे पहले खैरथल की स्थानीय कांग्रेस राजनीति में सक्रिय रहे हैं और नगर निकाय में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस बार उन्हें कांग्रेस की ओर से सभापति पद के संभावित चेहरों में गिना जा रहा था। पार्टी बदलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव में कांग्रेस 20 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी और उसे बोर्ड बनाने के लिए केवल तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन चाहिए था। अब चौधरी के भाजपा में शामिल होने तथा उनके साथ अन्य पार्षदों के जाने की खबर ने राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से खड़ा कर दिया है।
11 पार्षदों को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण
चौधरी के साथ कितने पार्षद भाजपा में आए हैं, इसे लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। एक रिपोर्ट में विक्रम चौधरी के अलावा 11 अन्य पार्षदों के भाजपा में जाने का दावा किया गया है और इनमें पांच से छह कांग्रेस पार्षद बताए गए हैं, हालांकि उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। दूसरी रिपोर्टों में चौधरी सहित 11 पार्षदों के भाजपा खेमे में आने की बात कही गई है। इसलिए बोर्ड के चुनाव से पहले वास्तविक दलीय संख्या संबंधित पार्षदों की औपचारिक स्थिति से ही स्पष्ट होगी।यदि कांग्रेस के कुछ निर्वाचित पार्षद वास्तव में भाजपा के साथ चले गए हैं और कुछ निर्दलीयों ने भी भाजपा का समर्थन किया है, तो मूल चुनाव परिणाम में बने 20-8-17 के समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। लेकिन सभापति का अंतिम फैसला निर्वाचित पार्षदों की मतदान प्रक्रिया से ही होगा।
चुनाव में कांग्रेस 20 सीटों के साथ बनी थी सबसे बड़ी पार्टी
खैरथल नगर परिषद में मतगणना पूरी होने के बाद कांग्रेस ने 20 वार्ड जीते थे। भाजपा को आठ सीटें मिलीं, जबकि 17 निर्दलीय जीतकर आए। यानी निर्दलीयों की संख्या भी किसी एक बड़े दल की तुलना में काफी महत्वपूर्ण थी।कारण था कि चुनाव परिणाम आने के साथ ही निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो गई थी। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए तीन अतिरिक्त मत चाहिए थे, जबकि भाजपा को अपने मूल आठ निर्वाचित पार्षदों के अतिरिक्त काफी समर्थन जुटाना था। अब विक्रम चौधरी के भाजपा में जाने के बाद दोनों राजनीतिक दलों की रणनीति बदलना तय है। निर्दलीयों के साथ-साथ दलों के टिकट पर जीते पार्षदों का रुख भी सभापति चुनाव तक महत्वपूर्ण रहेगा।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले— पार्षदों से संपर्क की कोशिश
खैरथल-तिजारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने विक्रम चौधरी के भाजपा में शामिल होने की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चौधरी से तत्काल संपर्क नहीं हो पाया और कांग्रेस अपने निर्वाचित पार्षदों की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कई पार्षद एक साथ रखे गए हैं। कांग्रेस के सामने अब चुनौती अपने निर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने की है। वहीं भाजपा उन पार्षदों के समर्थन को औपचारिक रूप देने की कोशिश करेगी, जिनके उसके साथ आने का दावा किया जा रहा है।
सभापति चुनाव तक जारी रहेगा संख्या का खेल
खैरथल में वर्तमान राजनीतिक गतिविधि का केंद्र अब सभापति पद है। 45 सदस्यीय परिषद में 23 मतों का आंकड़ा निर्णायक होगा। चुनाव नतीजे और उसके बाद हुए दल परिवर्तन अलग-अलग चरण हैं, इसलिए किसी दल का बोर्ड बनना अभी औपचारिक मतदान से पहले तय नहीं माना जा सकता।राजस्थान के कई नगरीय निकायों की तरह खैरथल में भी निर्दलीय पार्षद बड़ी संख्या में निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक संपर्क और पार्षदों की खेमाबंदी जारी रहने की संभावना है। अंतिम तस्वीर सभापति चुनाव के समय पार्षदों के वास्तविक समर्थन और मतदान से स्पष्ट होगी।
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