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September 16, 2026
150 सदस्यीय नगर निगम में भाजपा 78 सीटों के साथ बहुमत पार कर चुकी, सुनील कोठारी और पुनीत कर्णावट सहित कई नामों पर चर्चा, पार्षदों से भी रायशुमारी
जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अब पार्टी के भीतर मेयर और डिप्टी मेयर के नाम को लेकर मंथन तेज हो गया है। अभी 150 में से 146 वार्डों के परिणाम घोषित हुए हैं, जिनमें भाजपा 78 सीटें जीत चुकी है। कांग्रेस के खाते में 53 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं। चार वार्डों में EVM संबंधी तकनीकी समस्या के कारण पुनर्मतदान कराया जा रहा है, लेकिन 76 के बहुमत के आंकड़े को भाजपा पहले ही पार कर चुकी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं में इस बार मेयर पद के लिए वैश्य समाज, विशेष रूप से जैन समुदाय से किसी नेता को मौका देने का सामाजिक समीकरण सामने आया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सुनील कोठारी और पुनीत कर्णावट के नाम प्रमुखता से चर्चा में बताए गए हैं। हालांकि भाजपा ने अभी आधिकारिक रूप से मेयर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है और अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व को करना है।
सुनील कोठारी के नाम पर क्यों हो रही चर्चा
सुनील कोठारी वार्ड नंबर 112 से भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं। वह पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और प्रदेश उपाध्यक्ष तथा जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। चुनाव से पहले भी भाजपा ने वार्ड 112 से उन पर भरोसा जताया था और उन्होंने यहां जीत दर्ज की। पार्टी के भीतर चल रही सोशल इंजीनियरिंग की चर्चाओं में उनका नाम वैश्य-जैन प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने उन्हें मेयर पद की चर्चाओं में आगे बताया है, लेकिन इसे भाजपा का आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता।
पुनीत कर्णावट भी चर्चा में
पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट भी मेयर पद को लेकर चल रही आंतरिक चर्चा का हिस्सा हैं। भाजपा ने उन्हें वार्ड नंबर 76 से उम्मीदवार बनाया था। पार्टी संगठन और नगर निगम की राजनीति का अनुभव उनके पक्ष में चर्चा का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निकट माने जाने वाले नेताओं में भी शामिल किया गया है, हालांकि राजनीतिक निकटता संबंधी ऐसे आकलन संबंधित रिपोर्टों के हैं। टिकट वितरण के दौरान पुनीत कर्णावट के वार्ड को लेकर स्थानीय स्तर पर खींचतान की खबरें भी सामने आई थीं। इसी कारण मेयर प्रत्याशी के अंतिम चयन में संगठन, स्थानीय विधायक और प्रदेश नेतृत्व के बीच संतुलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधायकों की राय भी बनी चर्चा का विषय
भाजपा के अंदर एक और दिलचस्प राजनीतिक चर्चा यह है कि जयपुर शहर के कुछ विधायक चाहते हैं कि मेयर उनके अपने विधानसभा क्षेत्र से न बनाया जाए और उस विधानसभा क्षेत्र को प्राथमिकता मिले जहां भाजपा का विधायक नहीं है। इस संबंध में पार्टी स्तर पर आधिकारिक प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक रिपोर्टों में इस तरह की राय सामने आने की बात कही गई है। इसे लेकर यह राजनीतिक व्याख्या भी की जा रही है कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में दूसरा बड़ा सत्ता केंद्र खड़ा होने से बचना चाहते हैं। हालांकि यह केवल एक राजनीतिक आकलन है; संबंधित विधायकों ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कारण नहीं बताया है।
डिप्टी मेयर के लिए ब्राह्मण चेहरे पर भी मंथन
यदि मेयर पद के लिए वैश्य या जैन समाज से प्रत्याशी चुना जाता है तो डिप्टी मेयर के लिए ब्राह्मण समाज से किसी पार्षद को अवसर दिए जाने की चर्चा है। जयपुर शहर में भाजपा के कई ब्राह्मण पार्षद चुनाव जीते हैं और पार्टी में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर विचार चल रहा है। इस चर्चा में शैलेन्द्र भार्गव का नाम भी सामने आया है। वह वार्ड नंबर 43 से निर्वाचित हुए हैं और भाजपा के जयपुर शहर अध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में लंबे अनुभव के कारण मीडिया रिपोर्टों में उनका नाम मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों की चर्चाओं में शामिल किया गया है।
प्रतिभा शर्मा और शशि प्रकाश शर्मा के नाम भी चर्चा में
भाजपा यदि डिप्टी मेयर के लिए किसी नए या अपेक्षाकृत युवा चेहरे पर विचार करती है तो प्रतिभा शर्मा और शशि प्रकाश शर्मा के नाम भी स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में हैं। प्रतिभा शर्मा वार्ड नंबर 87 और शशि प्रकाश शर्मा वार्ड नंबर 97 से भाजपा उम्मीदवार थे और चुनाव परिणाम में दोनों के नाम विजेताओं की सूची में दर्ज हैं। हालांकि पार्टी ने इनमें से किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। इसलिए फिलहाल इन सभी नामों को संभावित दावेदारी अथवा आंतरिक चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
राजपूत समाज की ओर से भी प्रतिनिधित्व की मांग
डिप्टी मेयर को लेकर राजपूत समाज से जुड़े नेताओं की ओर से भी प्रतिनिधित्व की मांग की चर्चा है। पार्टी के सामने सवाल यह है कि मेयर और डिप्टी मेयर के दो पदों के जरिए शहर के विभिन्न सामाजिक समूहों को किस तरह प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसी समीकरण में मूल OBC समुदाय से किसी पार्षद को डिप्टी मेयर बनाए जाने का विकल्प भी आंतरिक चर्चाओं में बताया जा रहा है। हालांकि उम्मीदवार का चयन केवल जातीय समीकरण से तय होगा, ऐसा कोई आधिकारिक संकेत भाजपा नेतृत्व की ओर से नहीं दिया गया है।
बाड़ेबंदी में पार्षदों से रायशुमारी
निकाय चुनाव परिणाम से पहले ही भाजपा ने अपने कई प्रत्याशियों को एक साथ रखने की व्यवस्था की थी। पार्टी ने इसे प्रशिक्षण और संगठनात्मक समन्वय से जोड़ा, जबकि राजनीतिक तौर पर इसे बाड़ेबंदी के रूप में देखा गया। परिणाम आने के बाद भी निर्वाचित पार्षदों के साथ मेयर और अन्य पदों को लेकर रायशुमारी किए जाने की खबर है।प्रदेश नेतृत्व के सामने अब संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय विधायकों की राय और निर्वाचित पार्षदों के बीच स्वीकार्यता जैसे कई पहलू हैं। इसी आधार पर अंतिम उम्मीदवार का नाम तय होने की संभावना है।
जयपुर में मेयर चुनाव का कार्यक्रम फिलहाल टला
जयपुर में मेयर चुनाव की तारीख को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर पुनर्मतदान के कारण राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव की पूर्व निर्धारित प्रक्रिया स्थगित कर दी है। इन वार्डों के वोटों की गिनती 17 सितंबर को पूरी होने के बाद आयोग संशोधित चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। इसलिए भाजपा के पास उम्मीदवार के चयन के लिए अब कुछ अतिरिक्त समय है। चार लंबित वार्डों का परिणाम भाजपा के मौजूदा बहुमत को समाप्त नहीं करता, लेकिन सभी 150 पार्षदों की अंतिम तस्वीर साफ होने के बाद ही मेयर चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।फिलहाल सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेन्द्र भार्गव और अन्य नाम पार्टी की आंतरिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में हैं। अंतिम उम्मीदवार कौन होगा, यह भाजपा नेतृत्व की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
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