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September 15, 2026
कांग्रेस प्रदेशअध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा बोले— कहीं 4 हजार की आबादी का वार्ड तो कहीं 35 हजार का, 1 वोट से जीती भाजपा की 13 सीटों पर भी उठाए सवाल
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार और चुनाव से पहले किए गए परिसीमन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सत्ता में होने और परिसीमन का फायदा लेने के बावजूद भाजपा कई निकायों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के दौरान वार्डों की आबादी और मतदाताओं की संख्या में बड़े अंतर रखे गए, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हुए।डोटासरा ने कहा कि परिसीमन के नाम पर कहीं करीब 4 हजार की आबादी का वार्ड बनाया गया, तो कहीं लगभग 35 हजार की आबादी वाला वार्ड। इसी तरह कुछ वार्डों में करीब 600 मतदाता थे, जबकि उसी शहर के दूसरे वार्डों में लगभग 2,900 मतदाता तक थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परिसीमन पूरी तरह निष्पक्ष था, तो एक ही शहर के वार्डों की आबादी और मतदाता संख्या में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दिया।
जयपुर के वार्ड 31 और 135 का उदाहरण देकर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जयपुर नगर निगम के वार्डों का उदाहरण देते हुए कहा कि वार्ड नंबर 31 की आबादी 13,499 है, जबकि वार्ड नंबर 135 की आबादी 32,272 बताई गई है। उन्होंने कहा कि एक ही नगर निगम के दो वार्डों की आबादी में लगभग 2.4 गुना अंतर होना अपने आप में परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।डोटासरा ने कहा कि यदि वार्डों का गठन समान और निष्पक्ष आधार पर हुआ था, तो इतनी असमानता की वजह स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के मजबूत क्षेत्रों को बड़े वार्डों में शामिल किया गया, जबकि भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत छोटे वार्ड बनाए गए।
‘कांग्रेस के वोटों का प्रभाव कम करने की कोशिश’
गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक इलाकों को बड़े वार्डों में बांटकर वहां मौजूद मतदाताओं के राजनीतिक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया। दूसरी ओर भाजपा के पक्ष वाले इलाकों में छोटे वार्ड बनाकर वहां के वोटों को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति अपनाई गई।उन्होंने इसे कथित रूप से “सुनियोजित वोट मैनेजमेंट” बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। डोटासरा ने कहा कि भाजपा ने मतदाताओं के नाम काटने और सत्ता पर कब्जा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद कई जगह जनता ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया।
1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 से कम होने का दावा
डोटासरा ने निकाय चुनाव के परिणामों से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कुल 4,097 वार्डों में से 1,316 वार्ड ऐसे रहे, जहां भाजपा की जीत का अंतर 100 वोट से भी कम था। इनमें 772 वार्ड ऐसे बताए गए, जहां जीत का अंतर 50 मतों से नीचे रहा।उन्होंने यह भी दावा किया कि 13 वार्डों में भाजपा उम्मीदवार केवल एक वोट के अंतर से विजयी हुए। डोटासरा ने इन नतीजों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बेहद कम अंतर से जीत दर्ज होना भी जांच और राजनीतिक चर्चा का विषय है। हालांकि ये सभी आंकड़े कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किए गए दावों का हिस्सा हैं और चुनाव आयोग के अंतिम वार्डवार आधिकारिक आंकड़ों से इनका स्वतंत्र मिलान अलग से किया जाना आवश्यक होगा।
भाजपा के वोट शेयर में गिरावट का भी दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा के वोट शेयर को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा का वोट शेयर पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत और विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 7 प्रतिशत कम रहा।डोटासरा ने सवाल किया कि अलग-अलग चुनावों के बीच वोट शेयर में इतना बड़ा बदलाव किस कारण आया। उन्होंने इसे भाजपा के प्रति शहरी मतदाताओं की नाराजगी से जोड़ते हुए कहा कि निकाय चुनाव के नतीजों ने यह संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी राजनीतिक माहौल बदल रहा है।
‘कांग्रेस के वोट ज्यादा, सीटें भाजपा की ज्यादा’
डोटासरा ने जयपुर, टोंक और करौली जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस का कुल वोट शेयर भाजपा से अधिक रहा, लेकिन सीटों की संख्या में भाजपा आगे निकल गई। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस को कुल वोट ज्यादा मिले, तो सीटों के परिणाम भाजपा के पक्ष में अधिक कैसे गए।उन्होंने इसे परिसीमन से जोड़ते हुए कहा कि वोटों के भौगोलिक वितरण और वार्ड सीमाओं में बदलाव का असर सीटों के परिणाम पर पड़ा। कांग्रेस अब इस मुद्दे को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
निकाय चुनाव के बाद परिसीमन पर बढ़ी सियासत
राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों के बाद अब सिर्फ जीत-हार का गणित ही चर्चा में नहीं है, बल्कि वार्ड परिसीमन और वोट शेयर बनाम सीट शेयर का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। कांग्रेस ने जहां इसे भाजपा सरकार की कथित चुनावी रणनीति बताया है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर आने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।डोटासरा के बयान से यह साफ है कि कांग्रेस आगामी राजनीतिक लड़ाई में निकाय चुनाव के परिणामों के साथ-साथ परिसीमन की प्रक्रिया को भी बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। यदि कांग्रेस अपने आरोपों को आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।
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