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September 15, 2026
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने बनाई विशेष टीम, कोर्ट ने मुंबई पुलिस से पूछा था—इतने गंभीर आरोपों के बावजूद FIR क्यों नहीं हुई, साथ ही स्पष्ट किया कि पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी न माना जाए
मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने इसके लिए एक विशेष जांच टीम भी बनाई है। CBI की FIR में हत्या, गैंगरेप और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। हालांकि अभी किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी से मामले के सभी पहलुओं की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच में पर्याप्त सामग्री सामने आए बिना किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो CBI को सक्षम अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल करनी होगी और यदि अपराध साबित करने लायक सामग्री नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है, जिस पर दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का अधिकार रहेगा।
8 जून 2020 को हुई थी दिशा की मौत
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके की एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी। मुंबई पुलिस ने मामले में Accidental Death Report यानी ADR दर्ज कर जांच शुरू की थी। दिशा की मौत के सिर्फ छह दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत मिले थे। दोनों घटनाओं के बीच कम समय होने के कारण शुरुआत से ही कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं, हालांकि दोनों मौतों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।मुंबई पुलिस का शुरुआती निष्कर्ष था कि दिशा की मौत में किसी आपराधिक साजिश या बाहरी व्यक्ति की भूमिका का प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने बाद में मामले की जांच बंद कर दी थी। वर्ष 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए SIT गठित की। जुलाई 2025 में मुंबई पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा था कि SIT की जांच के निष्कर्ष भी शुरुआती जांच से मेल खाते हैं और उपलब्ध सामग्री से हत्या या यौन हमले की पुष्टि नहीं होती।
हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया था कि दिशा के पिता द्वारा गंभीर संदेह और आपराधिक आरोप लगाए जाने के बावजूद नियमित FIR दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने यह भी पूछा था कि केवल CrPC की धारा 174 के तहत ADR की जांच को संज्ञेय अपराध की नियमित जांच का विकल्प कैसे माना जा सकता है।हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि दिशा के साथ बलात्कार या हत्या हुई थी। कोर्ट का आदेश इन आरोपों की निष्पक्ष आपराधिक जांच कराने को लेकर था। यही वजह है कि CBI की जांच का परिणाम ही यह तय करेगा कि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है।
पिता बोले- छह साल से न्याय का इंतजार कर रहा था
दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी और उसके पीछे आपराधिक साजिश थी। उन्होंने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में गैंगरेप और हत्या की आशंका जताते हुए CBI जांच की मांग की थी।CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे करीब छह साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने के कारण इसमें खुशी की कोई बात नहीं है, लेकिन अदालत के आदेश और जांच शुरू होने से उन्हें राहत मिली है।
कई बड़े नामों की ‘भूमिका की जांच’ का जिक्र, लेकिन कोई औपचारिक आरोपी नहीं
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा FIR में आए विभिन्न राजनीतिक, फिल्म और पुलिस से जुड़े नामों को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिशा के पिता की शिकायत और बयान में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, रोहन रॉय, सचिन वाजे, परमबीर सिंह सहित कई लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग की गई है। कुछ अधिकारियों के नाम भी कथित कवर-अप संबंधी आरोपों के संदर्भ में सामने आए हैं।
लेकिन यहां महत्वपूर्ण अंतर यह है कि CBI ने फिलहाल किसी को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया है। FIR की सामग्री में किसी व्यक्ति की भूमिका की जांच का उल्लेख और उस व्यक्ति का आरोपी होना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में विशेष रूप से कहा था कि जांच अधिकारी को पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए।
दिशा के पिता के वकील निलेश ओझा ने दावा किया है कि कई प्रमुख लोगों की भूमिका की जांच होगी और जांच में जिनके खिलाफ सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि CBI अंततः क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है तो परिवार उसके खिलाफ अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकता है। यही अधिकार हाईकोर्ट के आदेश में भी सुरक्षित रखा गया है।
पोस्टमॉर्टम में ‘हेड इंजरी और मल्टीपल इंजरी’ का उल्लेख
दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इस नई जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। उपलब्ध पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड में मौत का कारण सिर की चोट और कई अन्य चोटें बताया गया था। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें ऊंचाई से गिरने से संबंधित थीं। पुराने रिकॉर्ड में यौन हमले की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई थी।मुंबई पुलिस ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी कहा था कि पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक रिकॉर्ड, CCTV, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों में गैंगरेप या हत्या के आरोपों की पुष्टि करने वाला साक्ष्य नहीं मिला।अब CBI इन्हीं दस्तावेजों को नए सिरे से देखेगी और यह भी जांच सकती है कि पोस्टमॉर्टम, घटनास्थल की जांच, डिजिटल सबूतों और पुलिस रिकॉर्ड के संरक्षण एवं विश्लेषण में कोई कमी या अनियमितता तो नहीं हुई थी।
पहले परिवार ने नहीं जताया था संदेह, बाद में बदला रुख
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शुरुआती दौर में दिशा के माता-पिता ने पुलिस के सामने किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं जताया था। पुराने रिकॉर्ड में सतीश सालियान ने जांच से संतुष्टि व्यक्त की थी। बाद के वर्षों में उनका रुख बदला और वर्ष 2025 में उन्होंने हाईकोर्ट का रुख कर कथित कवर-अप, यौन हिंसा और हत्या के आरोप लगाए।इसी विरोधाभास को मुंबई पुलिस और आदित्य ठाकरे की ओर से कोर्ट में उठाया गया था। आदित्य ठाकरे की तरफ से आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताया गया है। अब CBI को पुराने और नए दोनों बयानों के बीच अंतर सहित पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
छह साल बाद FIR से जांच व्यवस्था पर भी सवाल
मामले में छह साल बाद पहली नियमित FIR दर्ज होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पुलिस की जांच प्रक्रिया और केवल ADR के आधार पर लंबे समय तक मामला चलाए जाने पर सवाल उठाए थे। अदालत का मत था कि गंभीर आरोप सामने आने पर विधिवत आपराधिक जांच जरूरी थी।अब CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती छह साल पुराने साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उपलब्धता होगी। डिजिटल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, CCTV, मोबाइल डेटा, मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड तथा उस समय मौजूद लोगों के बयान एक बार फिर जांच के केंद्र में होंगे।CBI की FIR को किसी आरोप की अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दिशा सालियान की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसमें कोई आपराधिक साजिश शामिल थी। लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई यह नई जांच छह साल पुराने मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ले आई है।
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