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September 14, 2026
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट और मुख्यालय स्तर पर सूचना तंत्र को लेकर नाराजगी, राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पंचायत चुनाव से पहले स्थायी मीडिया सेल और पूर्णकालिक जनसंपर्क अधिकारी की मांग
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान चुनाव परिणाम और अन्य आधिकारिक सूचनाएं समय पर उपलब्ध नहीं होने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया कर्मियों का कहना है कि आयोग मुख्यालय स्तर पर प्रभावी मीडिया सेल स्थापित नहीं किए जाने के कारण चुनाव परिणामों, मतगणना की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए उन्हें अलग-अलग जिलों से सूचनाएं जुटानी पड़ीं। आयोग की वेबसाइट से भी अपेक्षित रूप से समयबद्ध चुनाव परिणाम उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आईं।
चुनाव जैसे बड़े प्रशासनिक अभियान के दौरान सामान्यतः राज्य निर्वाचन आयोग से अपेक्षा रहती है कि वह जिला निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त सूचनाओं को एकत्रित कर मुख्यालय स्तर पर प्रमाणित और समेकित जानकारी मीडिया तथा आम जनता तक पहुंचाए। इस बार ऐसी केंद्रीकृत व्यवस्था प्रभावी रूप से दिखाई नहीं देने के कारण मतगणना के दौरान विभिन्न नगर निकायों के परिणामों की आधिकारिक जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण रहा।
इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आयोग से चुनाव संबंधी आंकड़ों और सूचनाओं के बारे में पूछे जाने पर कथित रूप से यह कहा गया कि कई जानकारियां जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर उपलब्ध होती हैं। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में होती है, तो जिलों से सूचनाएं लेकर उन्हें एक स्थान से मीडिया और जनता के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।
यह भी कहा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव से काफी पहले मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित मीडिया सेल स्थापित करना चाहिए था। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की पर्याप्त तैनाती कर जिला स्तर से आने वाले आंकड़ों के संकलन, सत्यापन और प्रकाशन के लिए अलग व्यवस्था की जा सकती थी। ऐसा होने पर मीडिया कर्मियों को प्रत्येक जिले से अलग-अलग संपर्क कर परिणाम जुटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और आम जनता को भी एक आधिकारिक स्रोत से सही एवं समयबद्ध जानकारी मिल सकती थी।
मीडिया कर्मियों की ओर से चुनाव और मतगणना की कवरेज के लिए जारी किए जाने वाले पास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पहले राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय स्तर पर चुनावी कवरेज को व्यवस्थित करने में भूमिका निभाता रहा है, जबकि इस बार कई व्यवस्थाएं जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर छोड़ दिए जाने की बात सामने आई। इसके चलते चुनाव कवरेज और मतगणना केंद्रों तक मीडिया की पहुंच को लेकर अलग-अलग जिलों में अलग व्यवस्था देखने को मिली।
पत्रकारों का कहना है कि राज्य स्तर पर चुनाव होने की स्थिति में आयोग को एक समान मीडिया नीति और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। मतगणना जैसे महत्वपूर्ण दिन पर अधिकृत सूचना के अभाव में गैर-आधिकारिक आंकड़ों के प्रसार की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए आयोग की ओर से नियमित अंतराल पर आधिकारिक बुलेटिन जारी किया जाना जरूरी माना जा रहा है।
वेबसाइट पर समयबद्ध परिणाम नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायत सामने आई है। मतगणना के दौरान यदि वेबसाइट पर वार्डवार परिणाम, दलवार स्थिति और निकायवार अपडेट नियमित रूप से उपलब्ध हों तो मीडिया के साथ-साथ आम मतदाता भी आसानी से आधिकारिक नतीजे देख सकता है। लेकिन परिणामों की जानकारी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भरता ने आयोग की डिजिटल तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
चुनाव प्रक्रिया केवल मतदान कराने और मतगणना सम्पन्न कराने तक सीमित नहीं होती। मतदाताओं तक आधिकारिक सूचना पहुंचाना, मीडिया को प्रमाणित तथ्य उपलब्ध कराना और परिणामों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना भी चुनाव प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आयोग को अपनी सूचना प्रणाली को आधुनिक और केंद्रीकृत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
पंचायत चुनाव से पहले व्यवस्था सुधारने की मांग
अब आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से सूचना व्यवस्था में व्यापक सुधार की अपेक्षा की जा रही है। आयोग में स्थायी मीडिया सेल स्थापित करने, पूर्णकालिक जनसंपर्क अधिकारी नियुक्त करने और चुनाव अवधि में अलग-अलग जिलों से आने वाली सूचनाओं के लिए केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष बनाने की मांग उठ रही है।
वर्तमान में जनसंपर्क संबंधी कार्य अतिरिक्त प्रभार के आधार पर संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में चुनाव जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पूर्णकालिक अधिकारी और समर्पित टीम की जरूरत और अधिक महसूस होती है। पंचायत चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही आयोग यदि मतदाता, मतदान केंद्र, उम्मीदवार, मतदान प्रतिशत और मतगणना से संबंधित सूचनाओं के प्रकाशन की स्पष्ट व्यवस्था तैयार करता है तो भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।
सवाल यह भी है कि जब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय से की जाती है तो उसके बाद चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण और समेकित जानकारियां भी मुख्यालय से नियमित रूप से क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं। आयोग को इन सवालों पर गंभीरता से विचार करते हुए आगामी चुनावों से पहले अपनी मीडिया और जनसूचना व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
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