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September 10, 2026
जयपुर। मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी का सामुदायिक भवन करीब दो साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद एक बार फिर अपने मूल उद्देश्य—आमजन के उपयोग—के लिए उपलब्ध हो गया है। जिस भवन में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने पृथ्वीराज नगर के जोन 18 और 19 के कार्यालय संचालित कर दिए थे, उसे राजस्थान हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खाली कराकर दोबारा सामुदायिक उपयोग के योग्य बनाया गया है। इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई थी, जब पत्रकार कॉलोनी के निवासियों के लिए बने सामुदायिक भवन में JDA ने पृथ्वीराज नगर के जोन कार्यालय शुरू कर दिए। मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने भी इस सवाल को गंभीरता से लिया कि आवासीय कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधा के लिए आरक्षित सामुदायिक भवन को सरकारी कार्यालय में कैसे बदला जा सकता है। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सामुदायिक केंद्र का उपयोग सार्वजनिक हित के लिए होना चाहिए, न कि सरकारी कार्यालय के रूप में।
वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने दायर की जनहित याचिका
पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तपिश सारस्वत, निधि बिस्सा और अनीश बदाला ने अदालत में पैरवी की। फरवरी 2026 की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार मामला D.B. Civil Writ Petition No. 11590/2024 के रूप में हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष था।शुरुआती दौर में इस कानूनी लड़ाई को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी जताई गईं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल था कि क्या JDA जैसे प्राधिकरण से सामुदायिक भवन वापस लिया जा सकेगा। लेकिन मामला लगातार अदालत के समक्ष उठाया गया और आखिरकार भवन को सार्वजनिक उपयोग के लिए वापस उपलब्ध कराने की दिशा में आदेश हुए।
JDA ने कहा था- अस्थायी रूप से खोला गया कार्यालय
मामले की सुनवाई के दौरान JDA का पक्ष था कि पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन में पृथ्वीराज नगर का कार्यालय स्थायी रूप से नहीं, बल्कि अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है।अगस्त 2024 में भी JDA ने हाईकोर्ट को बताया था कि सामुदायिक भवन में कार्यालय चलाना अस्थायी व्यवस्था है और इसे बाद में दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। JDA की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने अदालत में प्राधिकरण का पक्ष रखा था। बाद की सुनवाई में अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आवासीय कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधा के तौर पर उपलब्ध सामुदायिक भवन की मूल उपयोगिता कायम रहनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा- सामुदायिक केंद्र आमजन के उपयोग के लिए
फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने JDA को सामुदायिक केंद्र खाली करने की दिशा में स्पष्ट कदम उठाने को कहा। अदालत ने सार्वजनिक उपयोग की इस तरह की जगह को कार्यालय में बदलने पर सवाल उठाया और भवन को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल करने पर जोर दिया।इसके बाद JDA ने सामुदायिक भवन से अपने कार्यालय और सामान हटाना शुरू कर दिया। मार्च 2026 में यह भी सामने आया कि प्राधिकरण ने अदालत की आगामी सुनवाई से पहले भवन खाली करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।
केवल भवन खाली करना काफी नहीं था
कानूनी लड़ाई का अगला चरण तब आया जब JDA ने भवन खाली तो कर दिया, लेकिन सवाल उठा कि वर्षों तक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बाद क्या वह तत्काल सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग योग्य स्थिति में है।याचिकाकर्ता पक्ष ने हाईकोर्ट के सामने कहा कि भवन के सभागार में किए गए पार्टिशन और दूसरे बदलावों के कारण उसकी मूल उपयोगिता प्रभावित हुई है। इसके बाद अप्रैल 2026 में खंडपीठ ने JDA को एक माह के भीतर भवन को पुनः सुविधायुक्त बनाकर आमजन के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसी सुनवाई में JDA की ओर से भी भवन को पूर्व की तरह सुविधायुक्त बनाने का आश्वासन दिया गया था।
फिर हाईकोर्ट ने दी 15 दिन की समय-सीमा
जब भवन की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई तो मामला दोबारा अदालत के सामने आया। जुलाई 2026 में हाईकोर्ट ने और सख्ती दिखाते हुए JDA को सामुदायिक भवन में आवश्यक सुविधाएं बहाल करने, रंग-रोगन और दूसरे कार्य पूरे कर इसे 15 दिन के भीतर पूर्ववत उपयोग योग्य स्थिति में देने के निर्देश दिए।याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया था कि केवल कार्यालय खाली कर देना पर्याप्त नहीं है और भवन को इस स्थिति में लौटाना भी जरूरी है कि कॉलोनीवासी वहां सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें।
₹10.33 लाख के कार्य के बाद लौटा मूल स्वरूप
मामले में भवन की सुविधाएं बहाल करने के लिए करीब ₹10.33 लाख के कार्य कराए जाने की जानकारी सामने आई। मरम्मत, रंग-रोगन और सामुदायिक उपयोग के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं के बाद अब भवन फिर से स्थानीय नागरिकों के उपयोग की स्थिति में आ गया है। इस तरह मामला केवल JDA कार्यालय हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालत की निगरानी में सामुदायिक भवन की वास्तविक उपयोगिता वापस बहाल कराने तक पहुंचा।
‘जागरूक नागरिक अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं’
वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने इसे नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण लड़ाई बताया। उनका कहना है कि किसी कॉलोनी के नागरिकों के लिए बनाई गई सार्वजनिक सुविधा यदि अपने निर्धारित उद्देश्य से हटाकर दूसरे इस्तेमाल में ली जाती है तो नागरिकों को संवैधानिक और कानूनी उपायों का सहारा लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि JDA ने याचिकाकर्ता की याचिका करने की पात्रता पर सवाल उठाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने यह आपत्ति स्वीकार नहीं की और माना कि राज्य प्राधिकरण के कथित गैरकानूनी कृत्य को कोई नागरिक चुनौती दे सकता है।
एक सामुदायिक भवन से आगे का संदेश
पत्रकार कॉलोनी का यह मामला केवल एक भवन खाली कराने की कानूनी लड़ाई नहीं रहा। इसने यह सवाल भी खड़ा किया कि शहरों में पार्क, सामुदायिक भवन, खेल मैदान और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित स्थानों का उपयोग क्या प्रशासन अपनी सुविधा के मुताबिक बदल सकता है।हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद JDA के जोन कार्यालय हटे, भवन की सुविधाएं बहाल हुईं और अब यह फिर से उस उद्देश्य की ओर लौट आया है, जिसके लिए इसे बनाया गया था—स्थानीय नागरिकों के सामाजिक और सामुदायिक उपयोग के लिए।करीब दो साल तक अदालत में चली इस लड़ाई का परिणाम अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। पत्रकार कॉलोनी के लोगों के लिए सामुदायिक भवन फिर खुलने की स्थिति में है और यह मामला नागरिक जागरूकता तथा सार्वजनिक सुविधाओं की कानूनी सुरक्षा का उदाहरण बनकर सामने आया है।
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