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September 9, 2026
पुष्कर पहुंची नंदा देवी लोकजात यात्रा, उत्तरांचल घाट पर पूजा
उत्तरांचल से निकली नंदा देवी लोकजात यात्रा पहुंची पुष्कर, उत्तरांचल घाट पर पूजा-अर्चना के साथ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने किया भव्य स्वागत, संस्कृति की झलक भी देखने को मिली
उत्तरांचल से रवाना पर्वतीय समाज की कुल देवी नंदा देवी की लोकजात यात्रा सोमवार को विभिन्न राज्यों से होते हुए तीर्थराज पुष्कर पहुंची। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने यात्रा का उत्साह से स्वागत किया। यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से होकर वराह घाट के समीप उत्तरांचल घाट पहुंची, जहां माता की डोली की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यात्रा के पहुंचने पर उत्तरांचल घाट पर धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने डोली के दर्शन किए और सरोवर की महिमा का स्मरण करते हुए पूजा में भाग लिया। इस दौरान घाट पर भक्ति और आस्था का माहौल दिखाई दिया।
तीर्थ पुरोहित जगदीशचंद्र तिवाड़ी ने श्रद्धालुओं को पुष्कर राज की पूजा-अर्चना करवाई। बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने नंदा देवी के दर्शन किए। इस दौरान उत्तरांचल की लोकसंस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
उत्तरांचल पर्वतीय समाज के अध्यक्ष डॉ. एसएस तड़ागी ने बताया कि लोकजात यात्रा बैदानी से रवाना हुई थी। दशोली से भी यात्रा निकाली जाती है। पुष्कर में समाज की धर्मशाला है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धर्मशाला के विकास की घोषणा कर चुके हैं, जिसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।
डॉ. तड़ागी ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य उत्तरांचल की संस्कृति को आगे बढ़ाना और बाहर रहने वाले पर्वतीय समाज को नंदा देवी के दर्शन करवाना है।
यात्रा के संयोजक पंडित धनी प्रसाद देवराड़ी ने बताया कि उत्तरांचल में नंदा देवी को बेटी मानकर हर वर्ष ससुराल भेजने की परंपरा है। लोकमान्यता के अनुसार वह गढ़वाल के राजाओं और कुमाऊं के कत्यूरी राजवंश की इष्ट देवी थीं, इसलिए उन्हें राजराजेश्वरी भी कहते हैं। माता को भगवान शिव की अर्धांगिनी पार्वती के रूप में पूजा जाता है। उन्हें शिवा, सुनंदा और नंदिनी नामों से भी पुकारते हैं।
उन्होंने बताया कि वार्षिक जात अगस्त-सितंबर में कुरुड़ मंदिर से बैदानी तक निकलती है। देवराड़ा को माता का ननिहाल मानकर वहां छह माह पूजा होती है। प्रवासी उत्तराखंडियों की यह यात्रा कुरुड़, मुंबई, बेलापुर, बसई, बड़ोदरा, उदयपुर, पुष्कर, जयपुर, आगरा, फरीदाबाद, दिल्ली और अंबाला होते हुए बैदानी पहुंचती है। पिछले दस वर्षों से नंदा देवी लोकजात पुष्कर आ रही है।
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