Post Views 01
September 9, 2026
कोटा। कोटा के बहुचर्चित चन्द्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड में बोरखेड़ा थाना पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर लिया है। पुलिस ने मामले में पुजारी सहित सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया है। इसके अलावा प्रकरण में निरुद्ध किए गए एक नाबालिग के खिलाफ भी चालान पेश किया गया है। न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय की है। इस हत्याकांड ने जून महीने में कोटा सहित पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। महंत देवानंद महाराज की मठ के भीतर उनके कमरे में धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई संदिग्धों से पूछताछ की और बाद में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।
5 जून की रात हुई थी महंत देवानंद महाराज की हत्या
बोरखेड़ा थानाधिकारी अजीत बागडोलिया के अनुसार घटना 5 जून की रात की है। महंत देवानंद महाराज मठ के अपने कक्ष में सो रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन पर चाकू से कई वार किए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के अगले दिन 6 जून को चन्द्रेसल मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर की रिपोर्ट पर बोरखेड़ा थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं से जांच शुरू की।
पुजारी सहित सात आरोपी किए गए गिरफ्तार
पुलिस की जांच के बाद इस मामले में संतोष कुमार राय, पूर्व संत नन्दनवन उर्फ नन्हें कुमार, महावीर प्रसाद पारेता, आदित्य वर्मा, मीकल जॉर्ज, अंकित बैरवा और पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस को आरोपी बनाया गया। पुलिस के अनुसार मीकल जॉर्ज आरोपी आदित्य वर्मा की पत्नी है। मामले में एक नाबालिग की भूमिका सामने आने के बाद उसे भी निरुद्ध किया गया था। अब अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने सभी सात वयस्क आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया है। निरुद्ध नाबालिग के संबंध में भी नियमानुसार चालान प्रस्तुत किया गया है।
केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया मामला
चन्द्रेसल मठ के महंत की हत्या के इस चर्चित मामले को पुलिस ने केस ऑफिसर स्कीम के तहत लिया है। इसका उद्देश्य गंभीर और संवेदनशील मामलों में प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग करना है। पुलिस की ओर से अब तक की जांच में जुटाए गए दस्तावेज, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य सामग्री चालान के साथ न्यायालय के समक्ष पेश की गई है।
शुरुआत में नहीं मिला था स्पष्ट सुराग
महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद शुरुआती दौर में पुलिस के सामने हमलावरों की पहचान को लेकर बड़ी चुनौती थी। घटना मठ के भीतर हुई थी और पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, आरोपियों की गतिविधियों तथा अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। हत्या के कुछ दिनों बाद पुलिस ने मामले में गिरफ्तारियां शुरू कर दी थीं। उस समय पुलिस जांच में मठ और उससे जुड़े विवादों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई थी।
अब न्यायालय में चलेगी आगे की कार्रवाई
पुलिस की ओर से चालान पेश किए जाने के साथ ही मामले की जांच का प्रमुख चरण पूरा हो गया है। अब आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों पर न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। मामले में अदालत ने 10 सितंबर को अगली पेशी तय की है। इसके बाद न्यायालय आरोप पत्र और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगा। चन्द्रेसल मठ की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान तथा महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद पैदा हुए आक्रोश के कारण इस मामले पर शुरुआत से ही लोगों की नजर बनी हुई है।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved