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August 25, 2026
101 साल पहले लिखी थी मंदिर की आत्मनिर्भरता की पटकथा, आज पांच पीढ़ियों को जोड़ रहा नया रंगजी मंदिर, दक्षिण भारतीय वास्तुकला, 7नौ कुंडीय यज्ञ और पांच हजार दीपों ने शताब्दी उत्सव को बनाया ऐतिहासिक
पांच हजार दीपों से जगमगाता मंदिर परिसर, वेद मंत्रों से गूंजती नौ कुंडीय यज्ञशाला और भगवान वैकुंठनाथ का 108 चांदी के कलशों से अभिषेक—तीर्थराज पुष्कर के नया रंगजी मंदिर में मंगलवार को आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। मौका था रामानुज संप्रदाय के प्रसिद्ध श्री रमा वैकुंठनाथ नया रंगजी मंदिर के पांच दिवसीय शताब्दी महोत्सव का। इस आयोजन ने मंदिर के 101 वर्ष पुराने इतिहास के साथ बांगड़ परिवार की दूरदृष्टि और पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक विरासत को भी जीवंत कर दिया।
करीब 101 वर्ष पहले डीडवाना निवासी सेठ मगनीराम बांगड़ और उनके भाई सेठ रामकुमार बांगड़ ने पुष्कर में इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। दोनों भाइयों का व्यापार कोलकाता में था, लेकिन धार्मिक सेवा के लिए उन्होंने तीर्थ गुरु पुष्कर को चुना। मंदिर का निर्माण शुरू कराने से पहले ही उन्होंने सौ वर्षों से भी आगे की सोच रखते हुए इसकी नियमित आय, पूजा-पाठ और अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्थायी आर्थिक प्रबंध कर दिए थे। सभी व्यवस्थाओं का आधार तैयार करने के बाद दोनों भाइयों ने अपने गुरु बालमुकुंदाचार्य की आज्ञा से मंदिर का शिलान्यास कराया। मंदिर को दक्षिण भारतीय स्वरूप देने के लिए विशेष कारीगर बुलाए गए। निर्माण में वास्तुशास्त्र और रामानुज संप्रदाय की परंपराओं का बारीकी से ध्यान रखा गया। यही कारण है कि एक सदी से अधिक समय गुजरने के बाद भी मंदिर अपनी स्थापत्य कला, भव्यता और धार्मिक मर्यादा को सहेजे हुए है।
शताब्दी महोत्सव के चौथे दिन सुबह गाजे-बाजे के साथ भगवान की अलग-अलग सवारियां निकाली गईं। विग्रहों का विधिवत पूजन करने के बाद रामानुज संप्रदाय की परंपरा के अनुसार तिरुमंजन अभिषेक कराया गया। भगवान का 108 चांदी के कलशों से अभिषेक करने के साथ तुलसी अर्चना और विष्णु सहस्रनाम पाठ हुआ। तिरुपति सहित दक्षिण भारत से आए करीब 40 से 45 पुजारियों के सानिध्य में नौ कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमानों ने आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, शांति और सुख-समृद्धि की कामना की। महोत्सव के दौरान भगवान का विवाह, कन्या पूजन, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए गए। इससे पूर्व
सोमवार शाम मंदिर परिसर में एक साथ पांच हजार दीप प्रज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी से पूरा मंदिर स्वर्णिम आभा में नहा उठा। इसके बाद हुई भव्य आतिशबाजी ने पुष्कर के आसमान को सतरंगी बना दिया। श्रद्धालुओं ने दीपदान में भाग लेकर भगवान वैकुंठनाथ से परिवार और विश्व की खुशहाली की कामना की। श्री सीमेंट के चेयरमैन एवं मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हरिमोहन बांगड़ ने कहा कि शताब्दी महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मंदिर की सौ वर्षों से कायम मर्यादा और बांगड़ परिवार की एकता का प्रतीक है। चार-पांच पीढ़ियां गुजरने के बावजूद परिवार की सभी शाखाओं के सदस्य आज भी मंदिर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन में बांगड़ परिवार के साथ परिवार की बेटियां, रिश्तेदार, मित्र, स्वामीजी के शिष्य और पुष्करवासी भी पूरी श्रद्धा से भागीदारी निभा रहे हैं। पूर्वजों ने पुष्कर को धार्मिक कार्य के लिए चुना था और नई पीढ़ियां उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। हरिमोहन बांगड़ ने मंदिर तथा परिवार से जुड़ी पुरानी संस्थाओं को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। बांगड़ स्कूल और बांगड़ चौराहे के विकास से जुड़े सुझावों पर उन्होंने मंदिर प्रबंधन से रिपोर्ट लेकर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिलाया।
मंदिर व्यवस्थापक सत्यनारायण रामावत ने बताया कि महोत्सव का समापन हवन की पूर्णाहुति और भगवान के पुनः मंदिर प्रांगण में विराजमान होने के साथ होगा। समारोह में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा की संगीत संध्या और विभिन्न संस्थाओं की ओर से संतों के अभिनंदन का कार्यक्रम भी रखा गया है। नया रंगजी मंदिर आज भी इस बात का उदाहरण है कि दूरदृष्टि के साथ स्थापित धार्मिक संस्थाएं केवल पूजा का स्थान नहीं रहतीं, बल्कि वे पीढ़ियों को जोड़ने वाली जीवंत विरासत बन जाती हैं।
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