Post Views 01
August 18, 2026
भारतीय किसान संघ चित्तौड़ प्रांत राजस्थान प्रदेश के बैनर तले बड़ी संख्या में अजमेर जिला मुख्यालय पहुंचे किसानों एवं ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।
मामला ग्राम पंचायत कानस के अधीन होकरा गांव का है, ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, जहां उनके पुश्तैनी मकान, बाड़े और कुएं बने हुए हैं, उस भूमि को बिना भौतिक सत्यापन के अजमेर विकास प्राधिकरण यानी एडीए के नाम दर्ज कर दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार यह फैसला पूरी तरह गलत है और इससे गरीब किसानों पर संकट खड़ा हो गया है।
भारतीय किसान संघ चित्तौड़ प्रांत राजस्थान प्रदेश,ज़िला मंत्री हीरा सिंह रावत ने आरोप लगाया कि पूर्व में यह भूमि सिवायचक श्रेणी में थी, लेकिन वर्ष 2013 में किसानों को जानकारी दिए बिना उसे एडीए के नाम दर्ज कर दिया गया। जबकि कई परिवार करीब 50-60 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं। मकानों में बिजली कनेक्शन लगे हुए हैं, बाड़े बने हुए हैं और किसान पीढ़ियों से इस भूमि पर खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और एडीए को ज्ञापन देकर भूमि को नियमित करने और मकानों व बाड़ों के पट्टे जारी करने की मांग की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उल्टा अब गरीब किसानों की तारबंदी और बाड़ों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुश्तैनी मकानों और भूमि को आबादी क्षेत्र घोषित कर किसानों को राहत दी जाए और जब तक पूरी प्रक्रिया नहीं होती, तब तक एडीए की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गांववासी आंदोलन और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाएंगे।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved