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June 19, 2026
जयपुर। अलवर के ईटाराणा सैन्य छावनी क्षेत्र से संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में पकड़े गए जोधपुर निवासी युवक कुंदन विश्नोई से अब जयपुर में गहन पूछताछ की जा रही है। पाकिस्तान के लिए जासूसी के संदेह में हिरासत में लिए गए आरोपी को अलवर से जयपुर लाया गया है, जहां इंटेलिजेंस ब्यूरो और राजस्थान पुलिस की विशेष शाखा की टीम उससे पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को उसके मोबाइल फोन से कई ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे पाकिस्तान से संपर्क, संदिग्ध लेन-देन और संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने की आशंका गहराई है।
प्रारंभिक जांच में आरोपी के मोबाइल से 900 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कॉल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें पाकिस्तान के एक नंबर पर बार-बार बातचीत होने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा हांगकांग के कुछ नंबरों से भी संपर्क की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मोबाइल कॉल डिटेल, चैट और डिजिटल डेटा की जांच से इस पूरे मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं।
जांच के दौरान आरोपी के फोन से बड़ी संख्या में चैट, तस्वीरें और अन्य फाइलें डिलीट पाई गई हैं। अब साइबर विशेषज्ञों की मदद से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी ने सेना से जुड़ी कोई संवेदनशील जानकारी साझा की थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस संदिग्ध नेटवर्क में अन्य लोग शामिल हैं या नहीं।
जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय कुंदन विश्नोई जोधपुर का रहने वाला है और सेकंड ईयर का छात्र बताया जा रहा है। उसे 14 जून को अलवर के ईटाराणा सैन्य छावनी क्षेत्र से संदिग्ध गतिविधियों के चलते हिरासत में लिया गया था। बताया जा रहा है कि उस समय वह एक छात्रा से बातचीत कर रहा था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होने पर सेना और आर्मी इंटेलिजेंस ने उससे पूछताछ शुरू की। बाद में मामला एमआईए थाना पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियों तक पहुंचा।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया, विशेष रूप से इंस्टाग्राम के जरिए अलवर कैंट क्षेत्र और आसपास की युवतियों से संपर्क बढ़ाता था। विश्वास हासिल करने के लिए वह महंगे उपहार भी भेजता था। जांच एजेंसियों को उसके पास पाकिस्तान से धन पहुंचने के भी कुछ संकेत मिले हैं। हालांकि, इन तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल आईबी, विशेष शाखा और साइबर विशेषज्ञ आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और डिलीट किए गए डेटा की गहन जांच कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस यह जानने पर है कि आरोपी का संपर्क किन विदेशी नंबरों से था, उसे धन किस माध्यम से मिला और क्या उसने सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कोई संवेदनशील जानकारी आगे भेजी थी।
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