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May 23, 2026
अजमेर में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का निरीक्षण, अतिरिक्त निदेशक ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा
अजमेर। आयुर्वेद विभाग की अतिरिक्त निदेशक ज्योति ककवानी ने गुरुवार को अजमेर के रामनगर एवं कोटड़ा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर आयुर्वेदिक अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, औषधि भंडारण, मरीजों की संख्या तथा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तार से जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त निदेशक ने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों एवं स्टाफ से बातचीत करते हुए मरीजों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने रजिस्टरों की जांच कर प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या, रोगों की प्रकृति तथा उपचार पद्धति की समीक्षा की। इसके साथ ही औषधि स्टोर रूम का निरीक्षण कर उपलब्ध आयुर्वेदिक दवाइयों की गुणवत्ता एवं रखरखाव व्यवस्था को भी परखा।
कोटड़ा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत चिकित्सक डॉ. सीमा कुमारी ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां सामान्य रोगों के उपचार के साथ-साथ योग एवं आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य परामर्श भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं आसपास के क्षेत्रों के लोग आयुर्वेदिक उपचार पद्धति पर विश्वास जताते हुए नियमित रूप से अस्पताल पहुंच रहे हैं।
वहीं रामनगर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह विभागीय स्तर का नियमित निरीक्षण था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 100 मरीज उपचार के लिए आते हैं। विशेष रूप से पंचकर्म चिकित्सा के लिए प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। पंचकर्म थेरेपी के माध्यम से जोड़ों के दर्द, नसों की कमजोरी, तनाव, त्वचा रोग एवं अन्य कई बीमारियों का उपचार किया जा रहा है, जिससे मरीजों को लाभ मिल रहा है।
निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त निदेशक ज्योति ककवानी ने अस्पतालों में साफ-सफाई, दवा वितरण व्यवस्था एवं मरीजों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्देश्य लोगों को पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति ही नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार भी है।
उन्होंने अस्पतालों में योग, आयुर्वेदिक परामर्श एवं पंचकर्म जैसी सेवाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया ताकि आमजन को प्राकृतिक एवं दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा का लाभ मिल सके। निरीक्षण के दौरान अस्पताल स्टाफ को रिकॉर्ड संधारण एवं मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
दोनों आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि लोगों का आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। विशेषकर पंचकर्म, योग एवं प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ने से आयुर्वेदिक अस्पतालों की उपयोगिता भी बढ़ती जा रही है।
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