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May 18, 2026
पुष्कर तहसील के होकरा गांव में अब पुश्तैनी मकानों और किसानों की जमीन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई रोकने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और भूख हड़ताल की जाएगी।
वॉइस ओवर — मामला ग्राम पंचायत कानस के अधीन होकरा गांव का है, जहां ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा जाहिर की। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, जहां उनके पुश्तैनी मकान, बाड़े और कुएं बने हुए हैं, उस भूमि को बिना भौतिक सत्यापन के अजमेर विकास प्राधिकरण यानी एडीए के नाम दर्ज कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह फैसला पूरी तरह गलत है और इससे गरीब किसानों पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में यह भूमि सिवायचक श्रेणी में थी, लेकिन वर्ष 2013 में किसानों को जानकारी दिए बिना उसे एडीए के नाम दर्ज कर दिया गया। जबकि कई परिवार करीब 50 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं। मकानों में बिजली कनेक्शन लगे हुए हैं, बाड़े बने हुए हैं और किसान पीढ़ियों से इस भूमि पर खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और एडीए को ज्ञापन देकर भूमि को नियमित करने और मकानों व बाड़ों के पट्टे जारी करने की मांग की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उल्टा अब गरीब किसानों की तारबंदी और बाड़ों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुश्तैनी मकानों और भूमि को आबादी क्षेत्र घोषित कर किसानों को राहत दी जाए और जब तक पूरी प्रक्रिया नहीं होती, तब तक एडीए की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गांववासी आंदोलन और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद का समाधान कैसे निकालता है।
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