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May 5, 2026
9 धुनियों के बीच तप की पराकाष्ठा: पुष्कर में विदेशी साधिका की अनोखी साधना
धार्मिक नगरी पुष्कर इन दिनों एक अनूठी साधना के कारण चर्चा में है, जहां रूस मूल की योगिनी अन्नपूर्णा नाथ 21 दिनों तक अग्नि के बीच तप कर रही हैं। नाथ संप्रदाय की परंपरा अनुसार यह ‘नौ धूनी अग्नि तपस्या’ छोटी बस्ती स्थित श्मशान क्षेत्र में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम में जारी है।
3 मई से शुरू हुई यह तपस्या 25 मई तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन धधकती धुनियों के बीच साधना की जाती है। शुरुआत 21 कंडों से हुई थी और अब प्रत्येक धूनी में लगभग 40 कंडे जलाए जा रहे हैं, जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। साधना के अंतिम दिन 108 कंडों से धुनियां प्रज्वलित होंगी।इस दौरान साधक भस्म लेप कर तेज गर्मी में अग्नि के मध्य बैठते हैं, जो तपस्या को अत्यंत कठिन बना देता है। प्रतिदिन की दिनचर्या में सुबह पूजा-अर्चना, दोपहर में तप, शाम आरती और रात्रि में हवन शामिल है। योगिनी अन्नपूर्णा नाथ का कहना है कि तपस्या का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सिद्धि नहीं, बल्कि समाज और विश्व कल्याण है। उनके अनुसार योग ऊर्जा है, जिसे संतुलित रखना आवश्यक है और तपस्या उसी का माध्यम है। उनके गुरु दीपक नाथ ने बताया कि इस प्रकार की तपस्या देश के कई हिस्सों—हरियाणा, जयपुर, जोधपुर, सिरोही और उज्जैन—में भी संतों द्वारा की जा रही है। कुछ संत 21, कुछ 108 और कुछ 1100 धुनियों के साथ तप करते हैं, जो यज्ञ परंपरा का ही एक स्वरूप है।अन्नपूर्णा नाथ पिछले 17 वर्षों से भारत में रह रही हैं और भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाया। वे वर्तमान में 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं, जिनमें से 35 के दर्शन कर चुकी हैं। भीषण गर्मी के बीच हो रही यह साधना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आश्चर्य का विषय बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग इस अनोखी तपस्या के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पुष्कर एक बार फिर आध्यात्मिक साधना का केंद्र बन गया है।
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