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April 22, 2026
आनासागर झील फिर आने वाली है जलकुंभी की चपेट में , नालों से निकलती जलकुंभी, तेज गर्मी के साथ-साथ आना सागर झील में भी फैलने लगी , आनासागर झील में गिरने वाले नालों के किनारे मिट्टी और कीचड़ से तेजी से पनप रही जलकुंभी, नगर निगम पहले ही जलकुंभी हटाने पर खर्च कर चुका है करीब 5 करोड रुपए,
बाड़ी नदी सहित आसपास के नालों से होती हुई जलकुंभी अब आनासागर झील में समाने को आतुर है।
गौरतलब है कि पूर्व में नगर निगम बोर्ड द्वारा जलकुंभी को आनासागर से साफ करने के लिए 5 करोड रुपए खर्च कर दिए गए थे। अब वही हालत फिर से पैदा होने को है जिसे रोकने में ही प्रशासन की सफलता है अन्यथा आनासागर झील एक बार फिर जलकुंभी की चपेट में आ जाएगी और फिर सरकार और प्रशासन को इसे हटाने के लिए करोड़ों रुपए ठिकाने लगाने पड़ेंगे। तेज गर्मी के दौरान जलकुंभी के बीज तेजी से पनपते हैं और नाले और झीलों में अपना फैलाव शुरू कर देते हैं। यही नालों का पानी जब झील में गिरता है तो वह अपने साथ जलकुंभी को भी बहा कर लाता है और फिर यह फैलाव करते-करते पूरी झील पर कब्जा कर लेती है।
अभी तक इसका कोई स्थाई समाधान प्रशासन के पास नहीं है लिहाजा इसे फैलने से पहले ही रोका जाए तो ज्यादा ठीक रहेगा। लोगों का आरोप है कि रोग को पनपने से पहले ही यदि ठीक कर दिया जाए तो बीमारी ज्यादा नहीं फैलती है लेकिन शायद प्रशासन पूरी बीमारी फैलने का इंतजार कर रहा है।जलकुंभी गंदे पानी में तेजी से बढ़ती है नालों के किनारो पर इसकी जड़े और बीज जमा रहते हैं जिससे यह बार-बार फैल जाती है।
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