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March 17, 2026
#मधुकर कहिन (नरेश मधुकर )
स्वामी दयानन्द सरस्वती समारक हैं या मसाला कंपनी का ब्रांडिंग बोर्ड
उद्योगपति पुत्र पूना बैठे आईएएस के दबाव में,खुद की दी हुईं मौका रिपोर्ट भूल गया एडीए प्रशासन
क्या स्वामी दयानंद के कद से भी बड़ा हो सकता हैं कोई भामाशाह ?
सोचा था अपना क्या जाए,आराम से वक़्त बिताता हूँ
अती देख देख मन घुटता हैं , सो अब कलम उठाता हूँ
मैंने सोचा था कि मैं अब ब्लॉग कभी नहीं लिखूंगा, क्योंकि मुझे किताबें लिखने में बहुत आनंद आने लगा था, और फिर अंतर्मन खाली करना ही लेखन का मूल उद्देश्य होना चाहिए l तो फिर क्यों किसी के बारे में लिखना,क्यों किसी बात पर टिप्पणी करना?? इसी सोच के साथ अच्छी खासी जिंदगी चल रही थी l लेकिन अचानक मैंने कुछ ऐसा देखा, जिसे देखकर मेरे अंतर्मन में बैठे शांत लेखक का दिल दुख गया l और एक बार फिर दराज में रखी कलम उठाने पर इतना मजबूर महसूस किया की आज यह ब्लॉग लिखना पड़ रहा है l
तो सब बात है जयपुर रोड स्थित स्वामी दयानंद सरस्वती, जी हां स्वामी दयानंद सरस्वती, वही दयानंद सरस्वती जो करोड़ों लोगों के आदर्श है l जिन्होंने आधुनिक भारत में सत्य की खोज हेतु नीव रखी l दयानंद सरस्वती जिनके नाम से अजमेर में यूनिवर्सिटी है l आज की जेन ज़ी पीढ़ी ने तो शायद, दयानंद सरस्वती को पूरी तरह पढ़ा ही नहीं होगा l परंतु हमने हमारे समय में सत्यार्थ प्रकाश के पठन पाठन वाला युग देखा हैं l इसी सत्य के प्रकाश फैलाने वाले अमर स्वामी दयानंद सरस्वती का स्मारक , जयपुर रोड पर उद्घाटित होने जा रहा है l उस स्मारक पर, एक मसाले बेचने वाली कंपनी ने सौंदर्य करण के नाम, पर जिस तरह खुद की ब्रांडिंग कर रखी है, वह देखकर मन बड़ा आहत है l
सी एस आर के नाम पर कॉर्पोरेट दुनिया में क्या-क्या हो रहा है, यह आम आदमी से भले ही छुपा हो, लेकिन बुद्धिजीवी वर्ग इसको भली-भांति समझता है l आम आदमी की आवाज तो यह कहकर दबा दी जाती है की - साहब हम समाज के लिए इतना पैसा खर्च कर रहे हैं... आप क्या जानो??
यह बात सुनकर मिडल क्लास आम आदमी चुप हो जाता है l स्वाभाविक भी हैं भाई!!! जिसकी जेब में दाल रोटी भर के ही पैसे महीने के अंत में आते हैं, वह ये करोड़ों की बातें जब सुनेगा, तो वह चुप रहने के अलावा कर भी क्या सकता है ?? लेकिन वही आदमी कहीं ना कहीं अंतर मन में, यह बात जरुर महसूस करेगा, कि स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम पर धन्ना सेठ लोग किस तरह से, खुद का महिमा मंडन, स्वामी जी के स्मारक पर कर रहे हैं l एक पुराने आर्य समाजी मित्र ने मुझसे कहा - मधुकर जी, यह तो आपकी निगाह है जो उसे मसाले बेचने वाली कंपनी के प्रचार पर पड़ गई है, क्या यह अजमेर के प्रशासन ने नहीं देखा होगा??? इस से पहले की मैं कूछवार कह पता वाहबखुद आगे बोलने लगा -
आर्य समाज के एक पदाधिकारी के सुपुत्र, आईएएस पद पर है l जो की मसूरी का आनंद लेने के बाद पूना की हवा खा रहे हैं l वही की हवा फोन के माध्यम से, अजमेर के प्रशासन के कान में फूंक देते हैं, और अजमेर का प्रशासन इन सब अनियमिताओं को देखकर भी आंखें बंद कर देता हैं l
कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि - इस मसाले बेचने वाली कंपनी को 3 साल के सौंदर्य करण के लिए यह स्मारक दिया गया है l मात्र सौंदर्य करण के लिए l जिसमें केवल यह स्वामी दयानंद की मूर्ति लगाने की ही अनुमति है l जबकि मौके पर अनुमति की शर्तों और नियमों का जबरदस्त उल्लंघन किया गया है l और इस अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने के आदेश तक जारी किये गए थे l चलिए उल्लंघन की तो बात तो दूर, लेकिन एक स्मारक को अपनी कंपनी का पर्सनल ब्रांडिंग बोर्ड बना देना??? वो भी इतना की देखने वालों के मन में संताप पैदा करता है l कि यह मसाले की ब्रांड का स्मारक है? या स्वामी दयानंद सरस्वती का?? फिर इसकी शिकायत डी सी कार्यालय को लिखित में होने के बाद, एडीए प्रशासन ने अपनी मौका रिपोर्ट में खुद लिखा था की यहाँ प्रत्यक्ष नीयमों का उल्लघन हुआ हैं l आज उस रिपोर्ट वाली फ़ाइल का भी आता पता नहीं हैं कार्यवाही तो क्या ही हुईं होगी l अक्सर ऐसी फ़ाइले खुर्द बुर्द या गुम हो जाना एडीए में आम बात हैं, एप्पल आई फ़ोन एक ऐसा आधुनिक प्रलोभन हैं जिसके आगे बड़े से बड़ा ईमान एक टांग पर आई फ़ोन दाता की धुन पे नाचने लगता हैं l अब देखना ये हैं की इतने घोर गलत काम कर के, कानून की आँखों में धूल झोक कर आखिर एडीए के के कैसे बच निकलते हैं??
यह सब बावली बातें सुनकर अपना तो दिमाग ही तहस नहस हो गया भाई!!!! सो मैंने सोचा की भले ही इन सब बातों में सच हो या ना हो, जांच तो होनी ही चाहिए.... क्यूँ ???
निवेदन है प्रशासन से की उद्घाटन से पहले इसकी जांच कर ली जाए, ताकि देश भर के आर्य समाज और स्वामी दयानंद के प्रेमियों की भावनाओं से हो रहे हैं इस खिलवाड़ को रोका जा सके l और अगर यह न कर सके तो, प्रशासन उस मसाले की ब्रांडिंग के नीचे कृपया उसके नीचे यह भी जरूर लिखवा दें आप
बाप बड़ा ने भैया सबसे बड़ा रुपैया
ताकि कम से कम यह स्मारक स्वामी दयानंद की स्मृति न बन सका तो कोई बात नहीं, आधुनिक युग की इस कड़वी सच्चाई का स्मारक जरूर नजर आए l ताकि सरकार के निर्देश और प्रयासों से इस मसाले बेचने वाली कंपनी के पैसे का जनता के हित में इतना सदुपयोग तो हो जाए l यह तो है असल बात बाकी सब है मोह माया... इस उद्घाटन पे रोक लगा कट जांच हो जाए तो समझूंगा की अब तक ईमान ज़िंदा हैं l
चलिए मिलते हैं अगले ब्लॉग में जल्दी
जय श्री कृष्णा
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