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February 21, 2026
अजमेर के डॉक्टरों का ऐतिहासिक कारनामा: भारी मार्बल ट्रॉली से कुचले गए मजदूर को मिला जीवनदान, ऐतिहासिक चिकित्सा चमत्कार: अजमेर में हुआ भारत का पहला और दुनिया का छठा सफल 'गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन' ऑपरेशन
पेट के दो टुकड़े (गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन) होने का भारत में पहला और दुनिया का छठा दर्ज मामला, सफल सर्जरी से बचाई जान
अजमेर, चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अजमेर के डॉक्टरों ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो विश्व के मेडिकल लिटरेचर में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। मार्बल सिटी किशनगढ़ में एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना का शिकार हुए 29 वर्षीय मजदूर को मौत के जबड़े से सुरक्षित वापस लाया गया है। अत्यंत भारी दबाव के कारण मरीज के पेट (आमाशय) के दो टुकड़े हो गए थे, जिसे मेडिकल भाषा में 'गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन' कहा जाता है। दुनिया भर में ट्रॉमा के कारण ऐसा होने का यह मात्र छठा और भारत का पहला मामला है। डॉक्टरों की त्वरित और सटीक सर्जरी ने इस नामुमकिन सी लगने वाली चुनौती को मुमकिन कर दिखाया है।
यह दिल दहला देने वाली घटना किशनगढ़ में हुई। 29 वर्षीय नुरसेद मार्बल से लदी एक भारी ट्रॉली के पास काम कर रहा था, तभी ट्रॉली अनियंत्रित होकर उसके पेट से जा टकराई। ट्रॉली के भीषण घर्षण ने नुरसेद के शरीर को बुरी तरह कुचल दिया। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत अजमेर के अस्पताल रेफर कर दिया गया।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जब मरीज को लाया गया, तो उसकी स्थिति किसी भी आम इंसान को विचलित कर देने वाली थी। पेट के ऊपरी हिस्से में 10 सेंटीमीटर का इतना गहरा घाव था कि पेट की बाहरी दीवार पूरी तरह फट चुकी थी और अंदरूनी अंग बाहर से ही दिखाई दे रहे थे। दर्द के कारण मरीज तड़प रहा था और उसका बायां पैर असामान्य रूप से बाहर की तरफ मुड़ा हुआ था, जो कूल्हे की हड्डी टूटने का स्पष्ट संकेत था।
मरीज का शरीर अंदर से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था। सीटी स्कैन और अन्य जांचों में जो तथ्य सामने आए, वे स्थिति की भयावहता बयां कर रहे थे:
अत्यंत भीषण दबाव के कारण मरीज का आमाशय आगे और पीछे की दीवार से होता हुआ, छोटी वक्रता से बड़ी वक्रता तक पूरी गोलाई में फट गया था।
तिल्ली में ग्रेड 2 और बाईं किडनी में ग्रेड 3 की गंभीर चोट थी।दाईं तरफ की 10वीं, 11वीं और 12वीं पसली, और बाईं तरफ की 6ठी से 10वीं (कुल 8 पसलियां) फ्रैक्चर थीं।बायीं तरफ इन्फीरियर प्यूबिक रमी और एसिटाबुलर फ्रैक्चर था।
6 जून को ही मरीज को तुरंत ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया। 'इमरजेंसी एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी' शुरू की गई।पेट खोलते ही अंदर भारी मात्रा में खून भरा मिला। सर्जनों ने सबसे पहले रक्तस्राव रोका, पेट की गहराई से सफाई की और फिर कटे हुए आमाशय को वापस अपनी जगह पर अत्यंत बारीकी से जोड़ा। मरीज तुरंत मुंह से खाना नहीं खा सकता था, इसलिए पोषण सुनिश्चित करने के लिए 'फीडिंग जेजुनोस्टोमी' की गई, जिसमें सीधे छोटी आंत में भोजन की नली डाली गई।
इस ऐतिहासिक सर्जरी को सफल बनाने में डॉ. अनिल के शर्मा, डॉ. पूर्णिमा सागर, डॉ. मेहुल सिंघल, डॉ. नमन सोमानी और डॉ. विपिन दीप सिंह की सर्जिकल टीम, डॉ. कुलदीप, डॉ. ज्योति और डॉ. एकता की एनेस्थीसिया टीम और नर्सिंग स्टाफ श्री नवीन की अहम भूमिका रही। (यहाँ हड्डी रोग और इमरजेंसी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने मल्टीपल फ्रैक्चर और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट में अपनी भूमिका निभाई।
प्रिंसिपल डॉक्टर अनिल सामरिया ने पत्रकारों को बताया कि पूरी दुनिया में गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन के सिर्फ 5 मामले सामने आए थे। यह विश्व का छठा और भारत का पहला मामला है, जिसे हमारे अस्पताल में सफलतापूर्वक मैनेज किया गया। यह हमारे संस्थान की विश्वस्तरीय सुविधाओं, आधुनिक ट्रॉमा केयर और हमारे डॉक्टरों की असाधारण विशेषज्ञता का प्रमाण है। यह केस भविष्य के मेडिकल छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक केस स्टडी बनेगा।
अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर अरविन्द खरे ने बताया किइतने भीषण मल्टीपल ट्रॉमा (पसलियों का टूटना, कूल्हे का फ्रैक्चर, किडनी और स्प्लीन डैमेज के साथ पेट का फटना) के बाद मरीज का बचना एक बहुत बड़ी मेडिकल उपलब्धि है। हमारी पूरी टीम—सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, ऑर्थोपेडिक्स और नर्सिंग स्टाफ—ने जिस तत्परता से काम किया, उसी की बदौलत आज एक युवा की जान बच पाई है।
अंततः, सघन चिकित्सा और डॉक्टरों की दिन-रात की मेहनत रंग लाई। नुरसेद को अस्पताल से सुरक्षित छुट्टी दे दी गई। यह सफलता केवल एक मरीज की जान बचाने की कहानी नहीं है, बल्कि इस बात का प्रतीक है कि भारतीय चिकित्सा जगत वैश्विक स्तर पर नए और जटिल मापदंड स्थापित कर रहा है।
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