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February 9, 2026
उदयपुर | केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने खेजड़ी आंदोलन को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और बिश्नोई समाज की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बेहद संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखा जाना चाहिए।
बीकानेर में चल रहे खेजड़ी आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए भागीरथ चौधरी ने उदयपुर में कहा कि राजनीति में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब माहौल शांत होता है, तब कुछ लोग उसमें भी चिंगारी सुलगाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि खेजड़ी आंदोलन को राजनीतिक रंग देने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि सरकार इस पूरे मामले का समाधान निकालने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
केंद्र सरकार के बजट को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार खेजड़ी से जुड़े पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। सरकार कभी नहीं चाहती कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो, विशेषकर खेजड़ी जैसे पवित्र, उपयोगी और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना भी है।
बिश्नोई समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए भागीरथ चौधरी ने कहा कि यह समाज पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी मिसाल है। पेड़ों को बचाने के लिए इस समाज ने पूर्व में जो बलिदान दिए हैं, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। सरकार इसी भावना को समझते हुए इस विवाद का ऐसा समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, जिससे पर्यावरण, समाज और विकासकृतीनों के बीच संतुलन बना रहे।
खेजड़ी विवाद के साथ-साथ मंत्री ने कृषि और अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इस दौरान उन्होंने ‘जीरामजी’ योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है और इसमें काम करने वाले श्रमिकों को पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। भागीरथ चौधरी ने नरेगा का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इस योजना में फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन नई व्यवस्था के जरिए ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा। उन्होंने दावा किया कि जीरामजी योजना किसानों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सभी के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और यह अध्यादेश देश की प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। मंत्री के अनुसार, इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
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