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January 23, 2026
उदयपुर एक बार फिर विश्व पटल पर चमका है। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मिट्टी के मटकों के जरिए ऐसा कीर्तिमान रचा, जो सिर्फ रिकॉर्ड नहीं बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी है। उदयपुर की शिकारबाड़ी में 1400 से अधिक मिट्टी के मटकों से ‘सेवा, संस्कृति और पर्यावरण’ शब्द उकेरते हुए उन्होंने अपना 10वां गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। यह रिकॉर्ड केवल संख्या का नहीं, बल्कि सोच का प्रतीक है—जहां पर्यावरण संरक्षण, कारीगरों के हुनर और जन-जागरूकता तीनों एक साथ नजर आए।
इस अनोखी पहल के तहत डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने पारंपरिक कुम्हारों से हजारों मटकों का निर्माण करवाया और उन्हें जरूरतमंद परिवारों में वितरित किया। इससे न केवल पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा मिला, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को भी संबल मिला। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने यह विश्व कीर्तिमान अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को जीवन का उद्देश्य बनाया, और यह रिकॉर्ड उन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मिट्टी के मटकों के वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक लाभ भी बताए। उन्होंने समझाया कि मटके का प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि पर्यावरण के भी अनुकूल है, जबकि अत्यधिक ठंडा फ्रिज का पानी कई बार शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ इससे पहले भी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, भूखमुक्त समाज, तनाव प्रबंधन और सौर ऊर्जा जैसे विषयों पर 9 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं। मार्च 2019 से जनवरी 2025 तक उनके रिकॉर्ड्स सेवा और संवेदनशीलता की एक अनूठी श्रृंखला बनाते हैं—कपड़ों के दान से लेकर सोलर लैम्पों से सूर्य की आकृति तक।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के ये प्रयास साबित करते हैं कि परंपरा और आधुनिकता जब साथ चलती हैं, तो विश्व रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि समाज के लिए मिसाल भी बनती है।
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