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January 20, 2026
उदयपुर की पहाड़ियों में चल रहे अवैध निर्माणों पर आखिरकार शिकंजा कस गया है। अरावली पर्वत श्रृंखला को छलनी कर बनाए जा रहे होटल, रिसोर्ट और विला पर उदयपुर विकास प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक होटल और 17 विला को सीज कर दिया, जबकि नियमों के विपरीत बनाए गए रास्ते, सीसी रोड और बिजली के पोल भी मौके से हटा दिए गए।जिला कलेक्टर नमित मेहता के हालिया दौरे के बाद सक्रिय हुए UDA ने राजस्व ग्राम सरे, मोहनपुरा और सरेखुर्द क्षेत्र में यह कार्रवाई की। यहां बिना अनुमति पहाड़ियों को काटकर न सिर्फ व्यवसायिक निर्माण किए जा रहे थे, बल्कि खतरनाक ढलानों पर गैर-तकनीकी तरीके से रास्ते भी बना दिए गए थे, जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकते थे।UDA आयुक्त राहुल जैन ने बताया कि मोहनपुरा क्षेत्र में बिना किसी सक्षम स्वीकृति के 17 विला बनाए गए थे, जिनका व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा था। इसके साथ ही ‘वेलेसा’ नाम से संचालित एक होटल भी बिना नियमों का पालन किए चलाया जा रहा था। इन मामलों में भूखंड स्वामियों ने न तो आवासीय प्रयोजन के लिए लैंड कन्वर्जन कराया और न ही कॉमर्शियल उपयोग की अनुमति ली।UDA उपायुक्त जगदीश सिंह आशिया ने खुलासा किया कि करीब पांच महीने पहले 70 नए राजस्व गांवों को UDA क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन गांवों में बेतरतीब पहाड़ी कटिंग कर होटल, रिसोर्ट और विला खड़े कर दिए गए, जिससे पर्यावरण और सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा था।कार्रवाई के दौरान सरेखुर्द गांव में ‘एमरल्ड हिल्स’ नाम से की जा रही अवैध प्लानिंग भी उजागर हुई। यहां बिना नक्शा स्वीकृत कराए पहाड़ काटकर सड़कें बनाई गई थीं। UDA ने मौके से सभी अवैध सीसी रोड और बिजली के खंभे हटवा दिए।इसके अलावा मोहनपुरा में ‘इस्कान’ संस्था द्वारा बनाए जा रहे एक बहुमंजिला भवन पर भी सवाल खड़े हुए। आवासीय लैंड कन्वर्जन होने के बावजूद बिना किसी निर्माण स्वीकृति के काम चल रहा था। UDA ने संस्था को नोटिस जारी कर जरूरी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।आयुक्त राहुल जैन ने साफ चेतावनी दी है कि बिना स्वीकृति पहाड़ी कटिंग कर किए गए सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा। साथ ही पहाड़ों से जुड़े मॉडल विनियम-2024 के खिलाफ की जा रही प्लानिंग और भूखंड बिक्री पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। भविष्य में ऐसी अवैध प्लानिंग की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि आमजन सतर्क रह सके।UDA की इस कार्रवाई से अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन के सख्त तेवर साफ नजर आ रहे हैं।
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