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December 19, 2022
पुरातन काल से पुष्कर का जिक्र एक अरण्य तीर्थ क्षेत्र के रूप में किया जाता है। जहां वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रकृति ने स्वयं ही बना रखी है। अरावली की ऊंची पहाड़ियां तो पहाड़ियों के नीचे बसा घना जंगल वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। पहाड़ के क्षेत्रों में प्राकृतिक जल के स्रोत इन वन्यजीवों को अक्सर पहाड़ के निचले क्षेत्र में खींच लाते हैं। वहीं दूसरी ओर वन्य क्षेत्र के निकट आबादी क्षेत्र में कई बार वन्य जीव शिकार की तलाश में आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। जिसका ताजा उदाहरण 4 दिनों पूर्व बुधवार को तीर्थ नगरी पुष्कर के निकटवर्ती ग्राम पंचायत कडेल के अंतर्गत आने वाले गांव गुड़ा में देखने को मिला । जहां पुष्कर के वन्य क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को लंबे अरसे से एहसास करवा रहा तेंदुआ(लेपर्ड) ने 9 भेडो शिकार कर लिया । इतना ही नहीं मौके से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कमलाई की पुलिया पर तेंदुआ(लेपर्ड) चहल कदमी करते हुए भी दिखा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
भेड़ों के पोस्टमार्टम में हुई K9 दांतो से मौत की पुष्टि, मिलेगा मुआवजा
बुधवार को गुड़ा गांव में वन क्षेत्र के बाहर आबादी क्षेत्र में वन्य जीव लेपर्ड द्वारा 9 भेड़ों के शिकार के मामले में अब भेड़ों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। पोस्टमार्टम में तीखे पीले दांतो द्वारा भेड़ों के गले पर हमला कर उनकी श्वास नली अवरुद्ध करने की बात सामने आई है । साथ ही मौके पर मिले पगमार्क से जानवर के तेंदुआ होने की पुष्टि हुई है। जिसके चलते अब वन विभाग अनुमोदन प्रस्ताव आगामी 2 से 3 दिनों में भिजवाया जाएगा। नवीन नियमों के आधार पर प्रत्येक भेड़ की मृत्यु पर पालक को 3 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा । नवीन नियमों के आधार पर यदि कोई वन्यजीव आबादी क्षेत्र में जाकर जानवरों का शिकार करता है और इसकी तथ्यात्मक पुष्टि होती है तो पालक को भैंस और बैल के शिकार पर 25 हजार रुपए, गाय के शिकार पर 12 हजार 500 रुपए, भैंस बैल और गाय के बच्चे के शिकार पर 5 हजार रुपए, बकरी और भेड़ के शिकार पर 3 हजार रुपये, उठ के शिकार पर 25 हजार रुपये, खच्चर के शिकार पर 3 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है ।
वन विभाग ने शुरू की इलाके में दिन और रात की गश्त
वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी नरेंद्र चौधरी ने बताया कि पुष्कर वन क्षेत्र में लेपर्ड की मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। बुधवार को हुए मामले के बाद से ही विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में दिन और रात गश्त की जा रही है। चौधरी ने बताया कि अक्सर वन्य जीव के आबादी क्षेत्र में घुस जाने से इंसान और जानवर में संघर्ष हो जाता है। ऐसे में इस संघर्ष और पालतू जानवरों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य इस पूरे माह विभाग के कर्मचारियों द्वारा लगातार गश्त की जाएगी।
पुष्कर के तीनों क्षेत्रों में 6 लेपर्ड करते हैं विचरण
पुष्कर क्षेत्र में हर 1 वर्ष के अंतराल में लेपर्ड की चहलकदमी और उसकी मौजूदगी साक्षी मिलते रहते हैं। इस संबंध में जब जानकारी जुटाई गई तो । क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेंद्र चौधरी ने बताया कि पहाड़ के ऊपर क्षेत्र में जल के स्रोत सूखने पर वन्य जीव पहाड़ के निचले क्षेत्र में आते हैं । इस दौरान भूख लगने पर वन्य जीव पहाड़ी क्षेत्र के आसपास बसी आबादी में शिकार भी कर लेता है। जानकारी के अनुसार पुष्कर के नाग पहाड़ इलाके में 3 तेंदुए, खोरी गांव के पास बैद्यनाथ की पहाड़ी में 1 तेंदुआ, और नांद से कड़ेल तक की पहाड़ी में 2 तेंदुए अक्सर विचरण करते पाए जाते हैं। पुष्कर वन क्षेत्र में तेंदुए की संख्या से पुष्कर के पारिस्थितिकी तंत्र के संभल को साफ तौर पर समझा जा सकता है ।
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