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December 5, 2022
धार्मिकनागरी पुष्कर के पुष्कर सरोवर के करणी घाट पर स्थित पौराणिक करणी माता मंदिर में चल रही भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनकर सभी धर्मप्रेमी प्रेम के रंग में रंग गए ।व्यासपीठ पर बैठे कथा व्यास पवन जी शास्त्री ने कंश उद्दार ,उध्दव के गौकुल आगमन,बृज लीला,रास लीला,राधा रानी प्रेम प्रसंग और रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया तो सभी धर्मप्रेनी भावविभोर हो गए ।कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि महारानी रुक्मणि ने कभी भगवान कृष्ण को देखा तक नही था लेकिन वो नाम की दीवानी इस कदर हो गई कि भगवान से अपनी दुल्हन बनाने की प्राथना की ।भगवान ने भी रुक्मणी के भाई शिशुपाल की इच्छा के विरुद्ध महारानी रुक्मणी का हरण कर विवाह किया ।इस उपलक्ष्य में आयोजन स्थल से भगवान की बिन्दोली निकाली गई जिसमे नाचते गाते भक्तो ने भाग लिया ।भगवान की बारात का आयोजन स्थल पर शोभागमल पाराशर, अशोक पराशर, विपिन पाराशर सहित पूरे परिवार की और से स्वागत किया गया ।शादी की सभी रस्मो के बाद भगवान की वरमाला हुई ।
इससे पहले पुष्टिमार्गीय षष्ठपीठाधीश्वर परम पूज्य 108 श्री श्याम मनोहर गोस्वामी महाराज और 108 प्रियन्दु गोस्वामी जी महाराज भी कथा का श्रवण करने आये ।श्री श्याम मनोहर गोस्वामी ने धर्मप्रेमीयो को भागवत का महत्व बताते हुए कहा कि सभी पुराणों में भागवत चक्रवर्ती पुराण है ।यही कारण था कि सभी पुराणों के रचियेता भगवान वेदव्यास जी महाराज ने भी भागवत को सबसे बड़ा पुराण माना है ।
इस दौरान सत्यनारायण शर्मा,कैलाश शर्मा,विकास पाराशर, नटवर पाराशर, चतुर्भुज पाराशर, श्री प्रकाश पाराशर हेमनारायण पाराशर, धर्मं नारायण पाराशर, गंगा नारायण पाराशर, ,लखन पाराशर,मनमोहन पाराशर सहित अनेक धर्मप्रेमी मौजूद रहे ।
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