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September 6, 2026
अजमेर। नगरीय निकाय चुनाव से पहले अजमेर भाजपा की अंदरूनी राजनीति खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और दो बार भाजपा से मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत के बीच पिछले कई महीनों से चल रही खींचतान अब चुनावी मैदान तक पहुंच गई है।सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 4 की है, जहां धर्मेंद्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है। यहां भाजपा ने मोनिका जैन को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी नहीं उतारे जाने के कारण मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है।
वार्ड 4 बना भाजपा की अंदरूनी लड़ाई का केंद्र
वार्ड 4 को वासुदेव देवनानी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जा रहा है। ऐसे में धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी का यहीं से निर्दलीय चुनाव लड़ना भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है।गहलोत समर्थकों का आरोप है कि हेमा गहलोत को भाजपा का टिकट मिलने से रोकने में देवनानी की भूमिका रही। हालांकि यह आरोप समर्थकों की ओर से लगाया गया है और इसे पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है। भाजपा ने अंततः देवनानी समर्थक मानी जा रही मोनिका जैन को वार्ड 4 से प्रत्याशी बनाया।
पिछले महीने BJP छोड़ चुके हैं धर्मेंद्र गहलोत
धर्मेंद्र गहलोत ने पिछले महीने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी में टिकट और संगठनात्मक फैसलों को लेकर प्रभाव के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए थे। अब उनकी पत्नी के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से यह राजनीतिक मतभेद सीधे चुनावी मुकाबले में बदल गया है।
कांग्रेस प्रत्याशी नहीं होने से मुकाबला और दिलचस्प
वार्ड 4 में कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में भाजपा की मोनिका जैन और निर्दलीय हेमा गहलोत के बीच सीधी टक्कर बनने के आसार हैं। इस सीट का परिणाम केवल एक वार्ड की जीत-हार के तौर पर नहीं देखा जाएगा, बल्कि इसे अजमेर भाजपा के अंदर चल रहे शक्ति-संतुलन और स्थानीय नेतृत्व की पकड़ से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
देवनानी और अनीता भदेल के लिए भी चुनाव अहम
अजमेर में भाजपा की चुनावी रणनीति में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और पूर्व मंत्री एवं विधायक अनीता भदेल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं के अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। साथ ही केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी भी चुनावी रणनीति और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।भाजपा के लिए चुनौती केवल कांग्रेस से मुकाबला नहीं, बल्कि कई वार्डों में नाराज कार्यकर्ताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों से होने वाले संभावित नुकसान को नियंत्रित करना भी है।
वार्ड 4 के नतीजे पर रहेगी खास नजर
वार्ड 4 अब अजमेर निकाय चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गया है। यहां मुकाबला केवल दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा के पुराने और मौजूदा स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।अगर हेमा गहलोत भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देती हैं तो इसका राजनीतिक असर वार्ड की सीमा से बाहर भी दिखाई दे सकता है। वहीं भाजपा के लिए यह सीट संगठनात्मक एकजुटता साबित करने की बड़ी परीक्षा होगी।
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