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November 29, 2022
अरावली पर्वतमाला की श्रंखला के बीच अपने आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पुरातन इतिहास को संजोए पुष्कर अरसे से अपनी जमीन के नीचे कई ऐतिहासिक साक्ष्य संजोए हुए हैं। समय-समय पर क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य के दौरान यह साक्ष्य जमीन से निकलकर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाते हैं।
हालिया वाक्य सोमवार का है जहां पुष्कर कस्बे के कपड़ा बाजार के पास स्थित 110 साल पुराने जीआईसी मकान के चौक में खुदाई के दौरान सैंड स्टोन पत्थर से निर्मित भगवान हनुमान की खंडित मूर्ति वह मंदिर के अवशेष निकले। जिसे मकान मालिक ने मूर्ति समेत सभी प्राचीन अवशेषों को सुरक्षित रख लिया।
ब्रह्मा मंदिर के व्यवस्थापक एवं भूअभिलेख निरीक्षक अरुण पाराशर ने बताया कि उनके 110 साल पुराने मकान के चौक में पानी की खोज निर्माण के लिए खुदाई कराई जा रही थी। इसी दौरान करीब 6 फीट की गहराई में देवी हनुमान प्रतिमा निकली। खुदाई के दौरान मूर्ति का एक हिस्सा भी टूट गया। मूर्ति करीब 2 से ढाई फीट ऊंची है। इसके अलावा एक छोटे मंदिर के गुंबद नुमा पत्थर व दीपक भी निकला है। मुगल शासन काल के दौरान देशभर में मंदिरों को तोड़ने के साक्ष्य मिलते हैं। इन्हीं साक्षी से जुड़े किंवदंती है कि मुगल शासक औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान पुष्कर में कई मंदिरों को ध्वस्त किया था । कपड़ा बाजार के पास भी केशव राव जी का प्राचीन मंदिर था। जिसे भी मुगल सैनिकों ने ध्वस्त किया था।
इतिहास के पन्नों को यदि खंगाला जाए तो पता लगता है कि पुष्कर जैनों को भी पवित्र तीर्थ रहा है। जैनों की पट्टावलियों व वंशावलियों में यह क्षेत्र पद्मावती के नाम से विख्यात था। जिनपति सूरी ने ईसा पश्चात् 1168, 1188 व 1192 में इस स्थान की यात्रा की और अनेक लोगों को दीक्षा दी। इतना नही नाग व परमार दोनों ही जैन धर्मानुयायी जातियां यहाँ रहा करती थी । पुष्कर का बौद्ध धर्म से पुराना नाता रहा है । साँची स्तूप दानलेखों में, जिनका समय ई. पू. दूसरी शताबदी है, कई बौद्ध भिक्षुओं के दान का वर्णन मिलता है जो पुष्कर में निवास करते थे। पांडुलेन गुफा के लेख में, जो ई. सन् 125 का माना जाता है, उषमदवत्त का नाम आता है। यह विख्यात राजा नहपाण का दामाद था और इसने पुष्कर आकर 3000 गायों एवं एक गाँव का दान किया था। इतना ही नहीं यह भी माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां ब्राह्मणों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। फलस्वरूप बौद्धों की एक नई शाखा पौष्करायिणी यही स्थापित हुई।
पुष्कर कस्बे मैं पहले भी कई प्राचीन मूर्तियां वह शिलालेखों के साक्ष मिल चुके हैं। जिसमें मुख्य रुप से सावित्री माता मार्ग के पास रेतीले धोरों की खुदाई में दर्जनों जैन प्रतिमाएं और जैन संप्रदाय से जुड़ी मूर्तियां व अवशेष मिले थे। इससे पूर्व प्राचीन वराह मंदिर के पास भी बुद्ध धर्म से जुड़ी प्रतिमा मिली थी। जिन्हें पुरातत्व विभाग के अजमेर स्थित संग्रहालय के अधीक्षक में अपने कब्जे में लेकर संग्रहालय की दर्शक दीर्घा में सजा रखा है।
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